जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) क्षेत्र के हालिया विस्तार को लेकर अहम आदेश देते हुए नवनिर्मित क्षेत्रों में सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति बीएस संधू की पीठ ने जेडीए को निर्देश दिया कि वह इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न करे। अदालत ने इस मामले में प्रधान शहरी स्वास्थ्य सचिव, जेडीए अधिकारियों, स्थानीय स्वशासन विभाग, जिला कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब भी मांगा है।
यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की 3 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना को चुनौती दी है। इस अधिसूचना के तहत जेडीए क्षेत्र में 530 नए गांवों को शामिल किया गया था, जिससे इसका क्षेत्रफल लगभग 3,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 6,000 वर्ग किलोमीटर हो गया।
याचिका में कहा गया है कि इस विस्तार के दायरे में कृषि भूमि, पारिस्थितिक क्षेत्र, चरागाह, जल संग्रहण और वन भूमि भी शामिल हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय ढांचे पर असर पड़ सकता है।
साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि इस निर्णय से पहले स्थानीय निकायों, ग्राम पंचायतों या निवासियों से आपत्तियां नहीं मांगी गईं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि जेडीए आमतौर पर मास्टर प्लान के आधार पर विकास करता है, लेकिन 2025-2047 के लिए नया मास्टर प्लान अभी तक अंतिम रूप नहीं ले सका है।
इन परिस्थितियों में, बिना स्पष्ट विकास योजना के क्षेत्र विस्तार को अनुचित बताते हुए अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है। मामले में अगली सुनवाई की तारीख फिलहाल तय नहीं की गई है।

