जयपुर में IPL से पहले फ्लडलाइट टेंडर पर विवाद,जल्दबाजी में काम से गुणवत्ता पर उठे सवाल

Jaipur Rajasthan

जयपुर: जयपुर में प्रस्तावित IPL मैचों के आयोजन से पहले एसएमएस स्टेडियम में फ्लडलाइट्स बदलने के लिए जारी किए गए टेंडर पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा प्रकाश व्यवस्था का कार्य अत्यधिक जल्दबाजी में कराया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों पर संदेह उत्पन्न हो गया है।

सूत्रों के मुताबिक, PWD ने पहले इस कार्य को पूरा करने के लिए 2 से 3 महीने का समय बताया था, लेकिन अब वही काम महज 15 से 20 दिनों में पूरा किया जा रहा है। इस अचानक बदलाव ने पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

जानकारी यह भी सामने आई है कि स्टेडियम में 18–20 वर्ष पुरानी फ्लडलाइट्स को बदला जा रहा है, लेकिन जो नई लाइटें लगाई जा रही हैं, उनकी तकनीक भी अत्याधुनिक नहीं मानी जा रही। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में यह व्यवस्था अपेक्षित मानकों पर खरी नहीं उतर पाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, जिन हाई मास्ट पर नई LED लाइटें लगाई जा रही हैं, वे स्वयं 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं। नई लाइट फिटिंग्स का वजन अधिक होने के कारण इन पुराने ढांचों की स्थिरता और टिकाऊपन पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। आशंका है कि 2–3 वर्षों में ये संरचनाएं जवाब दे सकती हैं।

इन सभी पहलुओं को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है या फिर किसी विशेष पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा किया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी उठ रहा है। महज 15 दिनों के भीतर लाइट्स की आपूर्ति की शर्त यह संकेत देती है कि संभवतः किसी बोलीदाता या OEM के साथ पहले ही डील तय हो चुकी है और टेंडर प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।

मामले ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण और निष्पक्षता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। संबंधित विभागों की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।