जोधपुर। राजस्थान में खांसी की सिरप Dextromethorphan HBr Syrup की गुणवत्ता को लेकर मचे विवाद के बीच राज्य सरकार ने दवा कंपनी कायसन फार्मा की सभी 19 दवाओं के वितरण और उपयोग पर अस्थायी रोक लगा दी है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने प्रेस वार्ता में बताया कि जांच के लिए भेजे गए छह सैंपल की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, और सभी सैंपल मानक गुणवत्ता के पाए गए हैं।
मंत्री खींवसर ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत दवाओं की आपूर्ति से पहले हर बैच की दो बार जांच की जाती है। अगर किसी दवा में कमी पाई जाती है तो तुरंत स्टॉक रोका जाता है और संबंधित कंपनी पर कार्रवाई होती है।
भरतपुर, सीकर और झुंझुनू जिलों में हाल ही में बच्चों के बीमार होने और तीन मौतों के मामले सामने आने के बाद सरकार ने जांच शुरू की थी। हालांकि, मंत्री खींवसर ने स्पष्ट किया कि तीनों मामलों की प्राथमिक जांच में कहीं भी Dextromethorphan सिरप के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई।
- सीकर के 4 वर्षीय नित्यांश शर्मा,
- भरतपुर के सम्राट (25 वर्ष),
- और तीर्थराज (भरतपुर) — तीनों ही मामलों में अस्पताल रिकॉर्ड में इस दवा का उल्लेख नहीं मिला।
मंत्री ने बताया कि सीकर और भरतपुर में जिन बच्चों के बीमार होने की पुष्टि हुई थी, वे अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। संबंधित पीएचसी की डॉक्टर और फार्मासिस्ट को तत्काल निलंबित कर दिया गया है।
खींवसर ने जानकारी दी कि कायसन फार्मा के अब तक लिए गए 10,119 सैंपलों में से 42 असफल पाए गए थे, जिनमें से 39 कोविड काल के दौरान हुए थे। उन्होंने कहा कि “एहतियातन कंपनी की सभी दवाओं पर रोक लगाई गई है।”
केंद्र सरकार ने 2021 में और हाल ही में ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने यह एडवाइजरी जारी की है कि 4 साल से छोटे बच्चों को Dextromethorphan नहीं दी जाए। राज्य सरकार ने भी इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
चिकित्सा मंत्री ने बताया कि डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों को दवा देने से पहले उचित परामर्श दें। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए संभावित रूप से हानिकारक दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी अंकित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसके अलावा, औषधि नियंत्रक राजाराम शर्मा को भी मानक निर्धारण प्रक्रिया में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।
मंत्री खींवसर ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता तथा गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

