NCERT के नए मॉड्यूल में भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दोष मोहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन को ठहराए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि बीजेपी ने इसे ऐतिहासिक तथ्य बताया है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि बंटवारे की जड़ में हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग की जुगलबंदी थी, जबकि “इतिहास का सबसे बड़ा विलेन RSS है, जिसे पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी।”
वहीं, अखिलेश यादव ने कहा, “इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो माफीनामे भी सामने आ जाएंगे।”
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने NCERT को बहस की चुनौती दी और कहा कि “बीजेपी के कब्जे में आए NCERT को बंटवारे की सच्चाई ही नहीं पता।”
आरजेडी सांसद मनोज झा ने आरोप लगाया कि “इतिहास किसी की सोच से नहीं बदलता, लेकिन भाजपा नफरत की भाषा में माहिर है। ये लोग गांधी को भी दोषी ठहराते हैं।”
बीजेपी की तरफ से शहजाद पूनावाला ने कहा कि उस दौर में सत्ता में कांग्रेस, मुस्लिम लीग और माउंटबेटन थे, इसलिए जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है। वहीं गौरव भाटिया ने दावा किया कि “जिन्ना और राहुल गांधी की सोच एक जैसी है। अखंड भारत का बंटवारा जिन्ना की जहरीली सोच और कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का नतीजा था।”
NCERT मॉड्यूल में पंडित नेहरू के जुलाई 1947 के भाषण का अंश भी शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हमें या तो विभाजन स्वीकार करना होगा या फिर लगातार संघर्ष और अराजकता झेलनी होगी।”
इसके साथ ही मॉड्यूल में कश्मीर में आतंकवाद का संदर्भ, पंजाब और बंगाल की तबाही और विस्थापन का जिक्र है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान भी शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “बंटवारे का दर्द भुलाया नहीं जा सकता, इसी स्मृति में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है।”
गौरतलब है कि ये मॉड्यूल नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होते, बल्कि सप्लीमेंट्री सामग्री के रूप में बहस और चर्चाओं के जरिए छात्रों को पढ़ाए जाते हैं।

