जैसलमेर में शनिवार को एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान 144 वर्ष बाद ऐतिहासिक ‘दिव्य चादर’ को किले से बाहर लाया गया। यह अवसर दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरीश्वर महाराज के चादर महोत्सव का था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यह चादर केवल एक वस्त्र नहीं बल्कि जैसलमेर की आस्था और इतिहास का प्रतीक है। उनके अनुसार करीब 144 वर्ष पहले जब शहर में महामारी फैली थी, तब इस पवित्र चादर के आगमन के बाद शहर को उससे राहत मिली थी।
शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है और धर्म केवल कर्मकांड नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन में संयम व करुणा का मार्ग है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।
इससे पहले दिन में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने जिला कलेक्ट्रेट में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक की अध्यक्षता भी की। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और अधिकारियों को परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान पेयजल प्रबंधन, जल जीवन मिशन, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क निर्माण और ग्रामीण विकास योजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई। शेखावत ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे और विकास कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।

