राजस्थान पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती 2021 को रद्द कराने और RPSC को भंग कर पुनर्गठन की मांग को लेकर जयपुर के शहीद स्मारक पर जारी धरने को समर्थन देने पहुंचे नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के साथ लगातार अन्याय कर रही है और अगर यही हाल रहा तो “नकल को संवैधानिक दर्जा” देना बाकी रह जाएगा।
“भजनलाल सरकार युवाओं से कर रही धोखा”
मीडिया से बातचीत में बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि बीकानेर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान मुख्यमंत्री के चेहरे के हावभाव इस बात की गवाही दे रहे थे कि सरकार इस भर्ती को रद्द करने के दबाव में है।
उन्होंने दावा किया कि “मंत्री की पौत्री अगर परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ी जाए और सरकार चुप रहे, तो यह संकेत है कि व्यवस्था कितनी लचर हो चुकी है।”
25 मई को मानसरोवर में होगी युवा आक्रोश महारैली
सांसद बेनीवाल ने घोषणा की कि 25 मई को जयपुर के मानसरोवर में ‘युवा आक्रोश महारैली’ आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेशभर से युवा भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद युवाओं में उत्साह है और रैली में एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है।
इस आयोजन के लिए जिलेवार संयोजक नियुक्त किए गए हैं, जो अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं से समन्वय कर रहे हैं।
“नियमों को ताक पर रख कर हो रहे नियुक्ति के फैसले”
बेनीवाल ने राजस्थान सरकार के विधि मंत्री जोगाराम पटेल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले तो उन्होंने अपने बेटे को उच्च न्यायालय में अतिरिक्त महाधिवक्ता बनवाया, फिर विरोध होने पर पद से इस्तीफा दिलवाया और इसके बाद उन्हें कर्मचारी चयन बोर्ड में अधिवक्ता नियुक्त करा दिया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पटेल की पौत्री को जोधपुर की एमबीएम यूनिवर्सिटी में नकल करते पकड़ा गया, और मंत्री पूरे मामले को ‘सेटल’ कराने में जुटे रहे।
“ऐसे मंत्री से नहीं हो सकता युवाओं को न्याय”
बेनीवाल ने मांग की कि जोगाराम पटेल को SI भर्ती से जुड़ी कैबिनेट सब-कमेटी के अध्यक्ष पद से तत्काल हटाया जाए, क्योंकि जिनके आचरण में ही भ्रष्टाचार और सिफारिश झलकती हो, उनसे राज्य के युवाओं को न्याय की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती।
हनुमान बेनीवाल ने चेताया कि अब यह आंदोलन सिर्फ एक भर्ती का नहीं, बल्कि युवाओं के सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुका है।

