मध्य पूर्व में तनाव के बीच फीकी पड़ी ईद,अल-अक्सा मस्जिद नमाज़ के लिए बंद

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तेल अवीव: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इस साल ईद का त्योहार फीका नजर आया। ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के तीसरे सप्ताह में प्रवेश के साथ क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं।
करीब 60 वर्षों में पहली बार यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद ईद की नमाज़ के लिए बंद रही। यह स्थिति 1967 का अरब-इजरायल युद्ध के बाद अभूतपूर्व मानी जा रही है।
शुक्रवार को यरुशलम के पुराने शहर में एक ईरानी मिसाइल का मलबा गिरने के बाद तनाव और बढ़ गया। यह मलबा पश्चिमी दीवार और अल-अक्सा मस्जिद से कुछ ही दूरी पर गिरा, जिसके बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई और क्षेत्र में प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए गए।
फरवरी के अंत से ही पुराने शहर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक है। केवल स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। अल-अक्सा मस्जिद और चर्च ऑफ़ द होली सेपल्कर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों को बंद कर दिया गया है।
ईद की नमाज़ के लिए पहुंचने की कोशिश कर रहे लोगों और सुरक्षा बलों के बीच शहर के प्रवेश द्वारों पर झड़पें भी हुईं, जिन्हें बाद में नियंत्रित किया गया।
वहीं Iran में भी ईद युद्ध के साये में मनाई गई, जहां बाजार सूने रहे। संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत जैसे देशों में सुरक्षा कारणों से खुले में ईद की नमाज़ पर प्रतिबंध लगाया गया।
गाज़ा पट्टी में भी लोगों ने तबाही और आर्थिक कठिनाइयों के बीच ईद मनाई। बढ़ती महंगाई और जरूरी वस्तुओं की कमी के कारण त्योहार का उत्साह काफी कम रहा।
पूरे क्षेत्र में इस बार ईद के जश्न पर संघर्ष, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और आर्थिक दबाव का गहरा असर देखने को मिला।