विधायी संस्थाओं में गुणवत्ता मानक और तकनीक पर जोर,AIPOC में ओम बिरला का आह्वान

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लखनऊ में चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के दूसरे दिन विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने पर व्यापक चर्चा हुई। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशभर की विधायिकाओं में गुणवत्ता के मानक स्थापित करने और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाने की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया।

सम्मेलन के दूसरे दिन तीन प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श हुआ—विधायी प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी का उपयोग, विधायकों की क्षमता-वृद्धि के जरिए लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करना और जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही। इन सत्रों में राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने चर्चा का संचालन किया।

अपने संबोधन में ओम बिरला ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली में देशभर की विधायिकाओं की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को शामिल करने और विधायकों की शैक्षणिक एवं पेशेवर क्षमताओं का रचनात्मक उपयोग करने की पहल सराहनीय है।

पूर्ववर्ती सम्मेलनों का उल्लेख करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि उत्कृष्टता, नवाचार और तकनीक के इस्तेमाल जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा जरूरी है। उन्होंने बताया कि विधायी प्रक्रियाओं और प्रथाओं के मानकीकरण को लेकर एक समिति गठित की गई है, जो इस दिशा में दीर्घकालिक सुधारों पर विचार कर रही है।

राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने विधान मंडलों की कार्यकुशलता बढ़ाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने संसद और राज्य विधान मंडलों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि संस्थागत ज्ञान के साझा उपयोग से विधायी कार्य अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

सम्मेलन का तीसरा और अंतिम दिन 21 जनवरी को होगा। इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला समापन संबोधन देंगे, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी समापन समारोह में शामिल होकर सम्मेलन को संबोधित करेंगे।