जयपुर के रामगढ़ बांध इलाके में मंगलवार को ड्रोन के ज़रिए कृत्रिम बारिश कराने का पहला प्रयास असफल रहा। तकनीकी और अनुमति संबंधी कारणों से ड्रोन 400 फीट से ऊपर नहीं उड़ पाया, जबकि बारिश के लिए बादल काफ़ी ऊंचाई पर थे।
अमेरिका और बेंगलुरु स्थित कंपनी जेन एक्स एआई इस प्रयोग को राजस्थान सरकार के सहयोग से अंजाम दे रही है। कंपनी के डायरेक्टर अजिंक्या धूमबाड़े ने बताया कि उनका ड्रोन 10,000 फीट तक उड़ने में सक्षम है, लेकिन नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से केवल 400 फीट तक की उड़ान की अनुमति मिली थी। उन्होंने कहा कि ऊंचाई की नई अनुमति मिलने में 7 से 10 दिन लग सकते हैं, जिसके बाद ऊंचे बादलों पर क्लाउड सीडिंग की जाएगी।
शुरुआती दो प्रयासों में ड्रोन या तो जमीन पर ही रुक गया या झाड़ियों में फंस गया। भारी भीड़ के कारण जीपीएस सिग्नल भी बाधित हुए, जिससे ड्रोन का संचालन प्रभावित हुआ। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ड्रोन को 400 फीट की ऊंचाई तक सफलतापूर्वक उड़ाया गया है और अगले 30 दिनों में रामगढ़ बांध में इस तकनीक से कृत्रिम बारिश कराई जाएगी।
भारत में अब तक क्लाउड सीडिंग के लिए विमान का इस्तेमाल होता रहा है। ड्रोन के ज़रिए छोटे क्षेत्र में कृत्रिम बारिश का यह पहला प्रयोग माना जा रहा है।

