पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन,कई राज्यों के राज्यपाल और आर्टिकल 370 हटाने के दौरान रहे थे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे और काफी समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उन्होंने दोपहर 1:20 बजे अंतिम सांस ली।

सत्यपाल मलिक को 11 मई को हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती किया गया था। 9 जुलाई को उनकी तबीयत को लेकर आखिरी स्वास्थ्य अपडेट सामने आई थी।

कई राज्यों के राज्यपाल रहे

सत्यपाल मलिक ने अपने राजनीतिक जीवन में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वे जम्मू-कश्मीर, बिहार, गोवा और मेघालय के राज्यपाल रहे। वर्ष 2018 में उन्होंने ओडिशा का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था।

उनका सबसे चर्चित कार्यकाल जम्मू-कश्मीर में रहा, जब वे 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक राज्यपाल पद पर थे। इसी दौरान, 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था।

भ्रष्टाचार के आरोप और CBI की जांच

सत्यपाल मलिक पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 22 मई 2025 को उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। ये चार्जशीट जम्मू-कश्मीर के किरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े लगभग 2,200 करोड़ रुपये के सिविल वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी के आरोपों से संबंधित थी।

इससे पहले 22 फरवरी 2024 को CBI ने मलिक के ठिकानों सहित दिल्ली के 29 अन्य स्थानों पर छापेमारी की थी।

सत्यपाल मलिक ने 2021 में खुद एक कार्यक्रम में यह दावा किया था कि उन्हें जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल रहते हुए रिश्वत देने की पेशकश की गई थी। उन्होंने कहा था कि उनके पास दो फाइलें आई थीं, जिनमें से एक एक बड़े कारोबारी से जुड़ी थी और दूसरी तत्कालीन गठबंधन सरकार के एक मंत्री से। उन्होंने कहा था कि दोनों मामलों में उन्हें 150-150 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।

CBI ने इन आरोपों की जांच के लिए दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं—एक 60 करोड़ रुपये के बीमा कॉन्ट्रैक्ट और दूसरी 2,200 करोड़ के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से संबंधित।

राजनीतिक जीवन

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। वे भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसी प्रमुख पार्टियों से जुड़े रहे। अपने खुले विचारों और सरकार की आलोचना के लिए भी वे अक्सर चर्चा में रहते थे।

उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक नेताओं और संगठनों ने शोक जताया है।