महाराणा प्रताप का इतिहास भूलने वाले समाज की पीढ़ियां भटक जाती हैं:गजेंद्र सिंह शेखावत

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जयपुर/ जोधपुर, 17 जून। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जो समाज अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास, गौरवगाथाओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित नहीं कराता, वह धीरे-धीरे आत्मविश्वास खो देता है। उसकी पीढ़ियों में “कॉकरोच पैदा होने लगते हैं।”

बुधवार को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में महाराणा प्रताप फाउंडेशन की ओर से आयोजित महाराणा प्रताप जयंती समारोह में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि महाराणा प्रताप की जयंती केवल एक वीर योद्धा को याद करने का अवसर ही नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्वाभिमान, स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अस्मिता और प्रतिरोध की उस चेतना को नमन करने का अवसर है, जिसने भारत को पराधीनता के अंधकार में डूबने से बचाने का काम किया।

शेखावत ने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल मेवाड़ या किसी एक राज्य का संघर्ष नहीं था, बल्कि वह साम्राज्यवादी और विस्तारवादी मानसिकता के विरुद्ध स्वाभिमान, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का संघर्ष था। इस संघर्ष में केवल योद्धाओं ने ही नहीं, बल्कि सामान्य जन, आदिवासी समुदायों और चेतक जैसे प्रतीकों ने भी अपनी भूमिका निभाई।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि इतिहास को लंबे समय तक एक पक्षीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। कई ऐसे प्रसंग, जिन्होंने भारत की प्रतिरोध क्षमता और वीरता को प्रदर्शित किया, उन्हें इतिहास के पन्नों से हाशिए पर डाल दिया गया। उन्होंने हल्दीघाटी और देवार के युद्धों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की वीरता और बाद की उपलब्धियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

शेखावत ने कहा कि भारत का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि निरंतर प्रतिरोध, पुनरुत्थान और आत्मगौरव का इतिहास है। बप्पा रावल, महाराणा सांगा, छत्रपति शिवाजी महाराज, बाजीराव पेशवा, गुरु गोविंद सिंह जैसे महापुरुषों ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

उन्होंने कहा कि इतिहास केवल तिथियों, युद्धों और घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह किसी राष्ट्र की सामूहिक स्मृति होता है। यदि किसी समाज की स्मृतियां कमजोर हो जाती हैं तो उसका आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है। इसलिए इतिहास का पुनर्स्मरण और शोध आधारित पुनर्लेखन समय की आवश्यकता है।

नई पीढ़ी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल युग में जो सामग्री इंटरनेट पर उपलब्ध होगी, वही आने वाली पीढ़ियों के ज्ञान का आधार बनेगी। इसलिए आवश्यक है कि प्रमाणिक और शोधपरक इतिहास को डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराया जाए।

अपने संबोधन के अंत में शेखावत ने कहा कि पहले दादा-दादी और नाना-नानी लोककथाओं और प्रसंगों के माध्यम से बच्चों को इतिहास और संस्कारों से जोड़ते थे। यदि समाज अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवगाथाएं नहीं सुनाएगा, अपने इतिहास पर गर्व करना नहीं सिखाएगा और उसे भुला देगा, तो उसकी पीढ़ियों में कॉकरोच पैदा होने लगते हैं।”

कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप फाउंडेशन के संयोजक प्रेम सिंह बनवास ने केंद्रीय मंत्री शेखावत का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर विधायक बालमुकुंद आचार्य, पूर्व सांसद रामचरण बोहरा सहित अनेक गणमान्य नागरिक और समाजजन उपस्थित रहे।