पटना, 6 नवंबर — बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में इस बार ऐतिहासिक मतदान दर्ज हुआ है। गुरुवार को 18 जिलों की 121 सीटों पर औसतन 64.69% वोटिंग हुई, जो राज्य में आज़ादी के बाद सबसे ज़्यादा है। इससे पहले साल 2000 में सबसे अधिक 62.57% मतदान हुआ था।
राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि इस बार भी महिलाओं ने पुरुषों से ज़्यादा वोट डाले हैं, जिससे एक बार फिर यह साफ हो गया है कि “महिला वोटर सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।”
2020 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी 56.69% थी, जबकि पुरुषों की 54.45%। इस बार आंकड़ा उससे भी आगे निकल गया। मतगणना 14 नवंबर को होगी।
पहले चरण में कुल 1314 उम्मीदवारों की किस्मत EVM में बंद हो गई है। इनमें 104 सीटों पर सीधा मुकाबला है, जबकि 17 सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई है। इस चरण में दो डिप्टी सीएम और 18 मंत्रियों की साख दांव पर है।
🔹 वोटिंग का गणित: जब-जब लालू, तब 60% से ज़्यादा मतदान
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बिहार में मतदान प्रतिशत हमेशा सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं देता। जब लालू प्रसाद यादव सत्ता में आए थे (1990, 1995, 2000), तब वोटिंग 60% से ऊपर थी। वहीं नीतीश कुमार के सत्ता में आने के चुनावों (2005, 2010) में वोटिंग प्रतिशत 50% के आसपास रहा।
हालांकि 2010 से अब तक मतदान लगातार बढ़ रहा है। इस बार पड़ा अधिक वोट “सत्ता के समर्थन” का है या “सत्ता के खिलाफ”, यह 14 नवंबर को पता चलेगा।
🔹 पीएम मोदी बोले — “पहले फेज़ में NDA ने भारी बढ़त हासिल की”
पहले चरण के मतदान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (X) पर लिखा —
“बिहार विधानसभा चुनावों में पहले चरण की वोटिंग में NDA ने भारी बढ़त हासिल कर ली है। दूसरे चरण में भी हर तरफ उसकी लहर दिखाई दे रही है।”
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को वे औरंगाबाद और भभुआ में जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
🔹 पहले फेज़ की प्रमुख घटनाएं
- लखीसराय: डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की गाड़ी पर हमला, राजद एमएलसी अजय सिंह से झड़प।
- पटना (मनेर): राजद उम्मीदवार भाई वीरेंद्र ने दरोगा को धमकाया — “आग लगा दूंगा।”
- वैशाली: राजद प्रत्याशी के समर्थकों ने CAPF जवानों पर पथराव किया।
- सारण: CPI प्रत्याशी सत्येंद्र कुमार की गाड़ी पर हमला।
- मुंगेर: नक्सल प्रभावित भीमबंद गांव में 20 साल बाद मतदान।
- पटना: बूथ पर विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव की मतदान कर्मियों से बहस।
- कई जिलों में EVM खराबी, कुछ बूथों पर बहिष्कार और मतदान रुकने की घटनाएं भी दर्ज हुईं।
🔹 बाहुबलियों की सीटों पर 50.8% वोटिंग
पहले चरण में 9 बाहुबलियों की सीटों पर औसतन 50.8% मतदान हुआ।
- गोपालगंज (कुचायकोट) — 65.57% (JDU के अमरेंद्र पांडे मैदान में)
- ब्रह्मपुर — 50.76% (हुलास पांडे उम्मीदवार)
- मोकामा — 62.16% (JDU के अनंत सिंह बनाम RJD की वीणा देवी)
- दानापुर — 55.27% (RJD के रीतलाल यादव)
- सीवान (रघुनाथपुर) — 51.18% (ओसामा शहाब, शहाबुद्दीन के बेटे)
🔹 महिलाओं की बढ़ती भागीदारी बनी चुनावी फैक्टर
सी-वोटर के संस्थापक यशवंत देशमुख का कहना है कि महिलाओं की अधिक वोटिंग नीतीश कुमार के पक्ष में जा सकती है, क्योंकि उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर लगातार काम किया है।
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर युवाओं ने रोजगार और परिवर्तन के नाम पर वोट किया है तो इसका लाभ तेजस्वी यादव या प्रशांत किशोर को मिल सकता है।
🔹 वोटिंग में उत्साह, लोकतंत्र का उत्सव
मुंगेर में मतदान कर्मियों ने EVM सील की, जबकि पटना में दो युवतियां साफा पहनकर घोड़े पर सवार होकर वोट डालने पहुंचीं।
फुलवारीशरीफ में चलने में असमर्थ 80 वर्षीय सोनाकलिया देवी को जवान ने कंधे पर उठाकर बूथ तक पहुंचाया — लोकतंत्र के इस उत्सव की तस्वीर पूरे दिन चर्चा में रही।
सारांश:
पहले चरण के मतदान ने बिहार में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और भारी मतदान ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि इस बार मुकाबला कड़ा है।
अब निगाहें 14 नवंबर पर हैं — जब तय होगा कि यह मतदान सत्ता के समर्थन में पड़ा या उसके खिलाफ।

