जोधपुर:-राजस्थान के जोधपुर में आयोजित ‘भारत की विश्व विरासत: राजस्थान’ प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। कार्यक्रम जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ, जहां उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और परंपराओं को आज़ादी के बाद के 60–65 वर्षों में सबसे अधिक नुकसान हुआ।
शेखावत ने कहा कि हजारों वर्षों तक चले विदेशी आक्रमणों और करीब दो सौ साल की अंग्रेजी हुकूमत के दौरान जितना नुकसान नहीं हुआ, उससे कहीं अधिक क्षति आज़ादी के बाद के दशकों में हुई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब देश सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर में प्रवेश कर रहा है और भारत अपनी पहचान को फिर से स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा की मौजूदगी में केंद्रीय मंत्री ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और श्रेष्ठ पोस्टर बनाने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
अपने संबोधन में शेखावत ने कहा कि देश के अभिलेखागारों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य उच्च पदों के बीच हुए सरकारी पत्राचार के साथ-साथ निजी पत्रों के भी करोड़ों पृष्ठ सुरक्षित हैं, जिन्हें राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में संरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन दस्तावेजों के संरक्षण के लिए सरकार बड़े स्तर पर डिजिटलीकरण अभियान चला रही है, जिसके तहत रोज़ लाखों पृष्ठ डिजिटल रूप में सुरक्षित किए जा रहे हैं।
उन्होंने भारत की प्राचीन पांडुलिपि परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि देश में ताड़पत्र, भोजपत्र, पेड़ों की छाल और रेशमी कपड़ों पर ज्ञान को लिपिबद्ध करने की परंपरा रही है। इस विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए सरकार ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ शुरू किया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पांडुलिपियों को डिजिटल और कंप्यूटर-रीडेबल बनाया जा रहा है।
उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया और कहा कि यह आयोजन भारत की तकनीकी और सांस्कृतिक क्षमता को दुनिया के सामने रखने का अवसर था।
कार्यक्रम के बाद प्रेस से बातचीत
प्रदर्शनी कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में शेखावत ने गैस आपूर्ति को लेकर उठ रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों या गैस की कोई कमी नहीं है और कांग्रेस इस मुद्दे पर लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, लेकिन सरकार ने आयात स्रोतों का विस्तार करते हुए अब 40 देशों के साथ समझौते किए हैं। उनके अनुसार पहले भारत 27 देशों से तेल आयात करता था, जबकि अब सप्लाई लाइन खाड़ी देशों से आगे बढ़कर अमेरिका तक पहुंच गई है।
शेखावत ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू गैस उपभोक्ता हैं और आपूर्ति सुचारू रखने के लिए बुकिंग प्रोटोकॉल लागू किया गया है। साथ ही गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर देश में किसी तरह का संकट नहीं है और यह मुद्दा राजनीतिक तौर पर उछाला जा रहा है।

