भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चली आ रही वार्ताओं के बाद मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अंतिम रूप ले लिया गया है। 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते की घोषणा की, जिसे दोनों पक्षों ने रणनीतिक और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया ।
समझौते के तहत 99 प्रतिशत से अधिक भारतीय निर्यात को यूरोपीय संघ के बाजार में प्राथमिकता आधारित पहुंच मिलेगी। सरकार के अनुसार इससे कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को खास फायदा होगा और एमएसएमई, महिलाओं, कारीगरों और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर खुलेंगे ।
एफटीए के माध्यम से सेवाओं, पेशेवर आवागमन, डिजिटल व्यापार और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भी बाजार पहुंच का विस्तार होगा, जबकि भारत ने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए निर्णायक कदम बताया ।
सरकार का कहना है कि यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ—जो मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा बनाते हैं—के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देगा और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगा ।

