भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला मंगलवार, 25 जून को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए। वे एक्सियम मिशन-4 (Ax-4) के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर 14 दिन बिताएंगे। इस मिशन के लिए उन्होंने स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से उड़ान भरी। यह मिशन 6 बार तकनीकी कारणों से टल चुका था।
शुभांशु की यह उड़ान 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में किसी भारतीय की पहली यात्रा है। वह ISS तक पहुंचने वाले पहले भारतीय भी बन गए हैं। मिशन लॉन्च होते ही शुभांशु ने कहा— “व्हाट ए राइड! मेरे कंधे पर तिरंगा है, जो बताता है कि मैं आप सबके साथ हूं।”
लॉन्चिंग देख भावुक हुए माता-पिता
लखनऊ में उनके माता-पिता आशा शुक्ला और शंभु दयाल शुक्ला ने बेटे की सफल उड़ान पर तालियां बजाकर खुशी जाहिर की और भावुक हो गए। इस मिशन में शुभांशु के साथ तीन अन्य एस्ट्रोनॉट भी शामिल हैं। स्पेसक्राफ्ट 28.5 घंटे की यात्रा के बाद 26 जून की शाम 4:30 बजे ISS से जुड़ेगा।
कौन हैं शुभांशु शुक्ला?
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में जन्मे शुभांशु NDA से पढ़े हैं और 2006 में वायु सेना में शामिल हुए थे। फाइटर पायलट रहे शुभांशु ने रूस, अमेरिका, ESA और JAXA जैसी स्पेस एजेंसियों से ट्रेनिंग ली है। उन्हें भारत के गगनयान मिशन के लिए भी चुना गया है।
ISS पर क्या करेंगे शुभांशु?
शुक्ला 14 दिनों तक ISS पर सात वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जिन्हें भारतीय संस्थानों ने तैयार किया है। इसके अलावा NASA के साथ पांच अन्य प्रयोगों में भी हिस्सा लेंगे। मिशन के दौरान उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने की भी उम्मीद है।
अंतरिक्ष में लेकर गए भारतीय मिठाइयां
शुभांशु अपने साथ अंतरिक्ष में आम का रस, गाजर का हलवा और मूंग दाल का हलवा भी ले गए हैं, जिसे वह अन्य एस्ट्रोनॉट्स के साथ साझा करेंगे।
मिशन से भारत को क्या लाभ?
इस मिशन से भारत के गगनयान कार्यक्रम को व्यवहारिक अनुभव मिलेगा। लौटने के बाद शुभांशु का डेटा और अनुभव भविष्य के मिशनों के लिए मार्गदर्शक बन सकता है। इस मिशन पर भारत ने लगभग ₹548 करोड़ का निवेश किया है।
एक्सियम-4: प्राइवेट स्पेस मिशन
Ax-4 मिशन अमेरिकी कंपनी Axiom Space का चौथा प्राइवेट मिशन है, जो NASA के सहयोग से संचालित हो रहा है। इसका उद्देश्य रिसर्च, टेक्नोलॉजी टेस्टिंग और अंतरिक्ष पर्यटन को बढ़ावा देना है।
क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन?
ISS पृथ्वी के चारों ओर 28,000 किमी/घंटा की रफ्तार से घूमने वाला एक अंतरिक्ष स्टेशन है, जहां वैज्ञानिक माइक्रोग्रैविटी में प्रयोग करते हैं। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है। इसे अमेरिका, रूस, जापान, यूरोप और कनाडा की स्पेस एजेंसियों ने मिलकर तैयार किया है।
भारत के लिए ये मिशन सिर्फ गर्व का क्षण नहीं, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की दिशा भी तय करता है।

