पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह इजराइल ने ईरान पर बड़ा हवाई हमला किया, जिसमें 78 लोगों की मौत हुई और 329 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इजराइल ने इस हमले में करीब 200 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करते हुए ईरान के छह प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
मारे गए वैज्ञानिक और सैन्य अधिकारी
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, इस हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख कमांडर हुसैन सलामी की मौत हो गई है। अल-जज़ीरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले में देश के दो प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक—मोहम्मद मेहदी तेहरांची और फरदून अब्बासी भी मारे गए हैं।
इजराइली सेना का दावा है कि इस हमले में ईरान के आर्मी चीफ मोहम्मद बाघेरी सहित शीर्ष सैन्य और परमाणु वैज्ञानिक भी मारे गए हैं। मृतकों में कुल 20 सैन्य अधिकारी और ईरान के छह परमाणु वैज्ञानिक शामिल बताए जा रहे हैं।
ईरान का जवाबी हमला—ड्रोन दागे
हमले के कुछ ही घंटे बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। उसने दोपहर में 100 से अधिक ड्रोन इजराइल की ओर दागे। हालांकि, इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि उन्होंने सभी ड्रोन को इंटरसेप्ट कर मार गिराया और एक भी ड्रोन इजराइली सीमा में प्रवेश नहीं कर पाया।
राजनयिक हलचल तेज
इस घटनाक्रम के बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की और उन्हें मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। नेतन्याहू के जल्द ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत करने की संभावना है।
परमाणु ठिकानों पर हमले का दावा
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली हमले में तेहरान के आस-पास के कम से कम छह सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें चार स्थानों पर परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकाने भी शामिल थे।
ईरान का सख्त संदेश
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने इस हमले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “हमारी सेना इजराइल को इस आक्रामकता की सजा दिए बिना नहीं छोड़ेगी।”
स्थिति पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। पश्चिम एशिया में इस नए टकराव से क्षेत्रीय शांति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

