जल जीवन मिशन घोटाला:महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज,अदालत ने बताया गंभीर मामला

Jaipur Rajasthan

राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका को ईडी मामलों की विशेष अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी पर गंभीर आरोप हैं, ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।

विशेष न्यायाधीश खगेन्द्र कुमार शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि महेश जोशी की गिरफ्तारी केवल संदेह के आधार पर नहीं, बल्कि जांच के ठोस आधारों पर हुई है।

ईडी का दावा: रिश्वत की रकम जोशी तक पहुंचती थी

ईडी के वकील अजात शत्रु ने अदालत में तर्क दिया कि घोटाले में कई बड़े ठेकेदार पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और महेश जोशी तक ठेकेदारों द्वारा दी गई रिश्वत की रकम पहुंचाई जाती थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में ठेकेदार महेश मित्तल समेत कुछ अन्य लोगों की जांच अभी भी चल रही है।

ईडी का यह भी आरोप है कि महेश जोशी के करीबी संजय बड़ाया पर 5 करोड़ रुपये के लेनदेन में शामिल होने के आरोप हैं।

बचाव पक्ष का पक्ष: आरोप काल्पनिक और साक्ष्य अधूरे

महेश जोशी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक राज बाजवा ने ईडी की कार्रवाई को “काल्पनिक” और “अधूरी जानकारी” पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि ईडी ने जोशी को मार्च 2024 में नोटिस भेजने के बाद एक साल तक कोई कार्रवाई नहीं की और अचानक अप्रैल 2025 में गिरफ्तारी की गई।

बाजवा ने यह भी आरोप लगाया कि ईडी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद गवाहों की वीडियोग्राफी नहीं करवाई, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।

क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की वह महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत हर ग्रामीण घर तक पाइप से स्वच्छ जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। इस योजना में राज्य और केंद्र दोनों 50-50 प्रतिशत खर्च साझा करते हैं।

अब तक की जांच में सामने आया है कि:

  1. योजना के तहत डाले जाने वाले उच्च गुणवत्ता के लोहे की जगह सस्ती HDPE पाइपलाइन बिछाई गई।
  2. कई इलाकों में पुरानी पाइपलाइन को नया बताकर भुगतान लिया गया, जबकि काम हुआ ही नहीं।
  3. कई जगहों पर तो पाइपलाइन बिछाई ही नहीं गई, फिर भी विभाग से पैसे निकाल लिए गए।
  4. ठेकेदार पदमचंद जैन ने हरियाणा से चोरी की पाइप लाकर नए पाइप बताकर लगाई और करोड़ों रुपये वसूले।
  5. इसी ठेकेदार ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के ज़रिए टेंडर हासिल किए, जिसे विभागीय अधिकारियों की जानकारी के बावजूद मंजूरी दी गई—क्योंकि ठेकेदार का एक राजनेता से नज़दीकी संबंध था।

अब तक की कार्रवाई

इस मामले में ईडी ने पीयूष जैन, पदमचंद जैन, महेश मित्तल और संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल नाम की दो कंपनियों ने फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर करोड़ों के टेंडर हासिल किए थे।

श्री गणपति कंपनी ने 68 में से 31 निविदाएं जीतकर करीब 860 करोड़ के टेंडर लिए, जबकि श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 73 निविदाएं जीतकर 120 करोड़ रुपये से अधिक के ठेके हासिल किए।

ईडी के छापों और दस्तावेज़ी सबूतों के बाद अब सीबीआई भी इस मामले में सक्रिय हो चुकी है और मई 2024 में केस दर्ज कर चुकी है।

फिलहाल स्थिति

जांच एजेंसियों की नजर अब महेश जोशी और उनके सहयोगियों की संपत्ति, लेनदेन और राजनीतिक संबंधों पर है। वहीं अदालत ने साफ कर दिया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, आरोपी को रिहा नहीं किया जा सकता।