जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा,राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वीकारा;अटकलें तेज

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भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को स्वीकार कर लिया। राज्यसभा में पीठासीन अधिकारी घनश्याम तिवाड़ी ने इसकी जानकारी दी। उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद उपसभापति हरिवंश ने सदन की कार्यवाही शुरू की और बाद में राष्ट्रपति से मुलाकात भी की।

धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अपने पद से त्यागपत्र दिया था। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना कार्यकाल अधूरा छोड़ने का फैसला किया। हालांकि, विपक्ष इसे सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ा मामला नहीं मान रहा है।

इस्तीफे के पीछे की दो थ्योरी

एक तरफ धनखड़ के त्यागपत्र में स्वास्थ्य कारण बताया गया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सहित विपक्षी दल इसे “रहस्यमयी” और “राजनीतिक पटकथा” का हिस्सा मान रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि 21 जुलाई को हुई एक संसदीय बैठक के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिससे धनखड़ आहत हुए। उनका आरोप है कि बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू की अनुपस्थिति जानबूझकर थी, और इससे उपराष्ट्रपति को ठेस पहुंची।

विपक्षी नेताओं ने यह भी दावा किया है कि धनखड़ का सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद था, जिनमें न्यायपालिका, संविधान में बदलाव, और धर्मांतरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।

15 महीने में छोड़ना होगा सरकारी बंगला

धनखड़ सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बने नए उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में पिछले साल अप्रैल में शिफ्ट हुए थे। अब इस्तीफे के बाद उन्हें लगभग 15 महीने में यह बंगला छोड़ना होगा और लुटियंस दिल्ली में टाइप VIII श्रेणी का नया आवास मिलेगा।

विवादों से जुड़े रहे धनखड़

धनखड़ का कार्यकाल कई बार विवादों में रहा। विपक्ष उनके ऊपर पक्षपात और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाता रहा है। दिसंबर 2024 में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लाया गया था, जो बाद में तकनीकी आधार पर खारिज हो गया।

धनखड़ ने अपने कार्यकाल में कई बार तीखे बयान दिए — ममता बनर्जी की सरकार को ‘लोकतंत्र का गैस चैंबर’ बताया, संविधान की प्रस्तावना में हुए बदलाव को ‘नासूर’ कहा और कोचिंग सेंटरों को ‘पोचिंग सेंटर’ कहा।

निजी जीवन की झलक

20 जुलाई को उन्होंने पत्नी सुरेश धनखड़ के जन्मदिन के मौके पर संसद टीवी के पत्रकारों को पार्टी दी थी। इससे पहले जनवरी में उन्होंने नए उपराष्ट्रपति भवन में चुपचाप गृह प्रवेश किया था और भागवत कथा का आयोजन किया था।

अब जबकि उन्होंने अचानक इस्तीफा दे दिया है, इस फैसले ने भारतीय राजनीति में नई अटकलों और बहसों को जन्म दे दिया है। क्या यह केवल स्वास्थ्य का मामला है या किसी गहरी राजनीतिक असहमति की परछाईं — इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकता है।