जयपुर, 11 नवंबर। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि राज्य के नगर निगमों को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई अनर्गल बयानबाजी का करारा जवाब दिया है। खर्रा ने अन्य राज्य की महा नगरपालिकाओं के सटीक उदाहरण और तथ्य रखते हुए राज्य सरकार के फैसले को उचित बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में गत कांग्रेस सरकार ने जयपुर, जोधपुर और कोटा तीन नगर निगमों को अपने राजनीतिक लाभ और कुछ लोगों की इच्छापूर्ति करने के लिए दो-दो नगर निगमों में विभाजित कर दिया था, जिनका किसी भी प्रकार का कोई औचित्य नहीं था।
खर्रा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों को एक करने के मामलें में जिस प्रकार की बयानबाजी करी जा रही है, उससे यह लगता है कि कहीं ना कहीं उनके राजनीतिक हितों पर गहरी चोट लगी है। इससे बौखलाकर वे लोग जयपुर, जोधपुर और कोटा की जनता को बरगलाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन उनका यह कुत्सित प्रयास किसी भी रूप में सफल नहीं होगा, क्योंकि जनता इतनी जागरूक है कि उन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार के बेहतर प्रशासन, बेहतर विकास और विकसित राजस्थान की दिशा में किए जा रहे विकास कार्यों पर पूरा विश्वास है।
नगरीय विकास राज्य मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के अनुरूप राजस्थान सरकार विकसित राजस्थान और आत्मनिर्भर राजस्थान की दिशा में जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उससे विपक्ष बौखलाकर अनर्गल बयानबाजी कर रहा है।
खर्रा ने कहा कि वर्तमान में जयपुर की जनसंख्या लगभग 40 लाख है। कोटा की 2025 में अनुमानित जनसंख्या लगभग 14 या 14.50 लाख है। 2025 में जोधपुर की अनुमानित जनसंख्या लगभग 15 लाख के आस-पास आंकी जा रही है।
जबकि 1883 में स्थापित भारत की सबसे पुरानी मुंबई महा नगरपालिका का क्षेत्रफल 480 वर्ग किलोमीटर से अधिक है और जनसंख्या लगभग 2.5 करोड़ से अधिक है, वहां भी केवल 227 पार्षद और 5 मनोनित पार्षद वृह्त मुंबई का शहरी प्रशासन संभालते हैं और वह भारत की सबसे मजबूत आर्थिक स्थिति वाली नगर पालिका है। इसी प्रकार 1876 में स्थापित कलकत्ता महा नगरपालिका का क्षेत्रफल भी 206 वर्ग किलोमीटर से अधिक है। वहां 144 पार्षद कलकत्ता महानगर पालिका का प्रशासन संभाल रहे है।
वहीं, दिल्ली लगभग 3.5 करोड़ आबादी वाली महा नगरपालिका है। एक समय में दिल्ली को भी दो नगर पालिका में विभाजित कर दिया था। लेकिन उसके परिणाम सही नहीं प्राप्त होने के कारण दोनों विभाजित नगर पालिकाओं का पुनर्गठन कर दिल्ली महा नगरपालिका का गठन किया था, जो कि दिल्ली का शहरी प्रशासन बखूबी संभाल रही है।

