BRICS सम्मेलन में मोदी का आतंकवाद पर सख्त रुख,वैश्विक संस्थाओं में सुधार की उठी मांग

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ब्राजील के रियो डी जनेरियो में रविवार को संपन्न हुए 17वें BRICS सम्मेलन में सदस्य देशों ने एक 31 पन्नों का साझा घोषणा पत्र जारी किया, जिसमें पहलगाम आतंकी हमले और ईरान पर इजराइली कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को केवल भारत नहीं, बल्कि पूरी मानवता पर हमला बताया और वैश्विक संस्थाओं के ढांचे में सुधार की पुरजोर वकालत की।

मोदी ने अपने भाषण में कहा, “आतंकवाद की निंदा सिद्धांत होनी चाहिए, सुविधा नहीं।” साथ ही उन्होंने कहा कि 20वीं सदी की संस्थाएं 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने में नाकाम हो रही हैं।

प्रधानमंत्री ने BRICS के भीतर विज्ञान, रिसर्च और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए साझा प्लेटफॉर्म की आवश्यकता जताई, साथ ही डिजिटल फेक कंटेंट पर नियंत्रण का सुझाव भी दिया। उन्होंने भारत में एक AI सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की।

इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने BRICS से जुड़ने की इच्छा जताने वाले देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। BRICS की ओर से जारी घोषणा पत्र में एकतरफा टैरिफ बढ़ाने पर चिंता जताई गई, हालांकि अमेरिका का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया।

घोषणा पत्र की प्रमुख बातें:

  • इंडोनेशिया को पूर्ण सदस्य और 9 अन्य देशों को साझेदार देश के रूप में शामिल किया गया।
  • UNSC में भारत और ब्राजील की भूमिका का समर्थन।
  • आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस और दोहरे मापदंडों को नकारा गया।
  • भारत की इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस का स्वागत।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थानीय मुद्रा और टिकाऊ विकास परियोजनाओं में भूमिका को सराहा गया।

ब्रिक्स में चीन की अपील और भारत की अगली मेज़बानी

चीन ने वैश्विक शासन में सुधार के लिए BRICS को अग्रणी भूमिका निभाने की अपील की। भारत को 2026 में BRICS अध्यक्षता और अगली शिखर बैठक की मेज़बानी का समर्थन मिला।

भारत-ब्राजील द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति

सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ब्रासीलिया जाएंगे, जहां राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा के साथ चार द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि अनुसंधान और आतंकवाद विरोधी सहयोग शामिल हैं।

BRICS की भूमिका और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

BRICS अब 11 उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देना और बहुध्रुवीय दुनिया की ओर बढ़ना है। पश्चिमी देशों में चिंता इस बात को लेकर बनी हुई है कि BRICS एक वैकल्पिक भुगतान प्रणाली और अपनी मुद्रा विकसित कर सकता है, जिससे डॉलर की भूमिका प्रभावित हो सकती है। भारत ने इस पर फिलहाल तटस्थ रुख अपनाया है।

ब्राजील में इस बार की BRICS बैठक ‘ग्लोबल ऑर्डर के लिए ग्लोबल साउथ का सहयोग’ विषय पर केंद्रित रही, जिसमें समावेशी विकास, जलवायु न्याय और वैश्विक दक्षिण के मुद्दों पर चर्चा हुई।