राजस्थान में इस साल मानसून ने रिकॉर्ड तोड़ दस्तक दी है। बीते 24 घंटों में पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में मूसलधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। तेज बारिश के चलते राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। अब तक बारिश से जुड़े हादसों में 9 लोगों की मौत हो चुकी है और दो लोग लापता बताए जा रहे हैं।
भारी बारिश से तबाही, नदियां उफान पर
भीलवाड़ा, जालोर, अजमेर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और जोधपुर सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं। लगातार बारिश से त्रिवेणी, बनास और कोठारी जैसी नदियां उफान पर हैं। कई इलाकों में एनीकट टूटने से घरों में पानी घुस गया और खेत-खलिहान जलमग्न हो गए।
SDRF का रेस्क्यू अभियान जारी
भीलवाड़ा में अलग-अलग जगहों पर तीन दर्दनाक घटनाएं सामने आईं, जिनमें तीन लोगों की जान गई। एक मजदूर तेज बहाव में बह गया, एक सफाईकर्मी नाले में डूब गया और एक किसान खेत से लौटते समय बह गया। वहीं जयपुर के फागी में आकाशीय बिजली गिरने से खेत में काम कर रही दो महिलाओं की मौत हो गई।
पाली, बूंदी और कोटा में भी डूबने से मौतें हुई हैं। पुलिस और SDRF की टीमें राहत व बचाव कार्यों में जुटी हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने जयपुर, दौसा और टोंक में 4 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अगले 4-5 दिनों तक कोटा, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर और जयपुर संभागों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
बीसलपुर बांध में रिकॉर्ड जलभराव
मानसून की शुरुआत के पहले ही महीने में औसत से 135% अधिक बारिश दर्ज की गई है। इससे जयपुर के मुख्य जल स्रोत बीसलपुर बांध में रिकॉर्ड जलस्तर देखने को मिला है। बीते 24 घंटे में बांध में 85 सेंटीमीटर पानी की आवक हुई है। अकेले त्रिवेणी नदी से 1.80 टीएमसी पानी बांध में आया, जो जयपुर की एक महीने की पानी आपूर्ति के बराबर है। बांध का जलस्तर 63.31% तक पहुंच चुका है।
जल्द खुल सकते हैं बीसलपुर के गेट
विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो जुलाई में ही बीसलपुर बांध के गेट खोलने पड़ सकते हैं। पिछली बार यह गेट सितंबर में खोले गए थे, लेकिन इस बार जल्दी ऐसा होने की संभावना है।
24 घंटे में कहां कितनी बारिश हुई
- जालोर: 136 मिमी
- सिवाना: 75 मिमी
- समदड़ी: 64 मिमी
- शेरगढ़: 58 मिमी
- बालोतरा: 53 मिमी
- पचपदरा: 52 मिमी
राज्य सरकार और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया है।

