प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को त्रिनिदाद एंड टोबैगो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रवासी भारतीयों की संघर्षपूर्ण यात्रा को ‘साहस की मिसाल’ बताया। पोर्ट ऑफ स्पेन में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने भले ही गंगा और यमुना को पीछे छोड़ा हो, लेकिन रामायण और भारतीय संस्कृति को अपने साथ बनाए रखा।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आपके पूर्वजों ने जो कठिनाइयां झेली थीं, वे सबसे मजबूत इरादों को भी तोड़ सकती थीं, लेकिन उन्होंने उम्मीद के साथ हर संकट का सामना किया। वे सिर्फ प्रवासी नहीं थे, बल्कि भारत की सभ्यता के दूत थे।”
इस मौके पर उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि अब भारतीय मूल की छठी पीढ़ी को भी ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड मिलेगा।
30 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की त्रिनिदाद यात्रा
PM मोदी त्रिनिदाद की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। त्रिनिदाद एंड टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला परसाद-बिसेसर और राष्ट्रपति क्रिस्टीन कांगालू समेत उनके 38 मंत्रियों ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। यह पिछले तीन दशकों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली त्रिनिदाद यात्रा है।
PM मोदी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ डिनर भी किया। इस दौरान भारतीय मूल के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य से स्वागत किया।
राम मंदिर की प्रतिकृति और सरयू जल भेंट
PM मोदी ने भारतीय समुदाय की श्रीराम में गहरी आस्था की सराहना की और कहा कि त्रिनिदाद की रामलीला विश्वभर में अनोखी है। उन्होंने कहा कि वह अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की एक प्रतिकृति और सरयू नदी का पवित्र जल अपने साथ लाए हैं।
उन्होंने कहा, “मैं कमला जी से आग्रह करता हूं कि इस जल को त्रिनिदाद की गंगा धारा में अर्पित करें।”
“कमला परसाद-बिसेसर बिहार की बेटी हैं”
PM मोदी ने अपने भाषण में त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री कमला बिसेसर के बिहार कनेक्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पूर्वज बक्सर से थे, और वह वहां का दौरा भी कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि “हम सिर्फ खून या सरनेम से नहीं, बल्कि अपनेपन की भावना से जुड़े हैं।”
त्रिनिदाद में भारतीय मूल की 40% आबादी
त्रिनिदाद एंड टोबैगो में भारतीय मूल की आबादी करीब 40% है। वर्ष 1845 में फातेल रज़ाक नाम का जहाज 225 भारतीय मजदूरों को लेकर यहां पहुंचा था। ये अधिकतर उत्तर प्रदेश और बिहार से थे, जिन्हें ‘गिरमिटिया मजदूर’ कहा गया।
आज इन्हीं गिरमिटिया मजदूरों की संतानें देश के प्रमुख पदों पर हैं। प्रधानमंत्री कमला बिसेसर और राष्ट्रपति क्रिस्टीन कांगालू, दोनों भारतीय मूल की हैं।
दौरे का मकसद: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देना
PM मोदी का यह दौरा दोनों देशों के सांस्कृतिक, आर्थिक और ऐतिहासिक रिश्तों को नया आयाम देने के मकसद से हो रहा है। इस दौरान रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर भी होने हैं।
इसके साथ ही भारत से त्रिनिदाद पहुंचे गिरमिटिया मजदूरों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ भी इस वर्ष मनाई जा रही है, जो इस दौरे को और अधिक विशेष बनाता है।
पिछली यात्रा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले अगस्त 2000 में भाजपा महासचिव के रूप में त्रिनिदाद गए थे और विश्व हिंदू सम्मेलन में भाषण दिया था।
त्रिनिदाद की खोज 1498 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने की थी। यह द्वीप 1962 में ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ। भारत ने सबसे पहले त्रिनिदाद से राजनयिक संबंध बनाए थे।
इस ऐतिहासिक जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा त्रिनिदाद और भारत के बीच नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।

