नरेंद्र मोदी–इमैनुएल मैक्रों मुलाकात:भारत-फ्रांस रिश्तों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा

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मंगलवार को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे हेलिकॉप्टर के निर्माण पर काम करेंगे, जो माउंट एवरेस्ट जैसी ऊंचाइयों तक उड़ान भर सके।

प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस को भारत का “विशेष साझेदार” बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत करने का फैसला किया है। उनका कहना था कि यह साझेदारी केवल व्यापार या रक्षा सौदों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक सहयोग को शामिल करेगी। भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत 1998 में हुई थी, जिसे अब नए स्तर पर ले जाया जा रहा है।

मुंबई में आयोजित इंडिया-फ्रांस इनोवेशन फोरम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि दुनिया की कई बड़ी कंपनियों का नेतृत्व भारतीय मूल के सीईओ कर रहे हैं। उन्होंने अल्फाबेट, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, एडोबी और पालो आल्टो नेटवर्क्स जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत अब वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है।

पीएम मोदी के भाषण की प्रमुख बातें

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस का संबंध ऐतिहासिक और विशेष रहा है। उन्होंने पिछले वर्ष फ्रांस में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन और मार्सेई यात्रा का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक जुड़ाव पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत-फ्रांस साझेदारी अब केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम नागरिकों, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स तक पहुंचेगी।
मोदी ने रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष, नई तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त नवाचार केंद्र खोलने और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत-फ्रांस साझेदारी स्थिरता और शांति के लिए एक मजबूत ताकत बन सकती है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और वैश्विक कंपनियों के साथ इसका जुड़ाव तेजी से बढ़ रहा है।

मैक्रों का संबोधन

राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि फ्रांस ‘मेक इन इंडिया’ पहल का मजबूत समर्थक है और रक्षा क्षेत्र में दोनों देश मिलकर इंजन, हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान और पनडुब्बियों के निर्माण पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-फ्रांस संबंध केवल हथियारों के लेन-देन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीन, समुद्र और आसमान—हर क्षेत्र में भरोसे और साझेदारी पर आधारित हैं।
मैक्रों ने भारत को तकनीक और नवाचार में उभरता हुआ वैश्विक नेता बताते हुए कहा कि फ्रांस तकनीक हस्तांतरण और रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांत पर भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाना चाहता है।

दौरे का महत्व

राष्ट्रपति बनने के बाद यह मैक्रों का चौथा भारत दौरा है। इससे पहले वे 2018 में पहली बार भारत आए थे, जबकि 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन और 2024 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी भारत की यात्रा कर चुके हैं।

दोनों देशों ने ‘होराइजन 2047’ रोडमैप की समीक्षा, नवाचार नेटवर्क की स्थापना, रक्षा सहयोग के नवीनीकरण, संयुक्त अनुसंधान केंद्रों की स्थापना, दुर्लभ खनिजों में सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा समझौते और हेलिकॉप्टर निर्माण जैसी कई पहलों पर सहमति जताई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा को रक्षा, तकनीक, विज्ञान, स्वास्थ्य, स्टार्टअप और अक्षय ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में भारत-फ्रांस सहयोग को और गहरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।