जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन और जनविरोधी नीतियों पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल कागजों की बाजीगरी है, जो प्रदेश को आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबों, किसानों तथा युवाओं के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
बजट पर वित्तीय आरोप
जूली ने कहा कि भाजपा सरकार ने 5 साल के कर्ज को मात्र 2 साल में ही पार कर लिया है। इसके विपरीत कांग्रेस सरकार ने कोविड-काल के बावजूद 5 साल में ₹2.26 लाख करोड़ का कर्ज लिया था। वर्तमान सरकार 3 साल में ₹2.22 लाख करोड़ का कर्ज लेने जा रही है।
उन्होंने बताया कि विकास कार्यों (Capital Outlay) में 28% की भारी कटौती की गई है। वर्ष 2025-26 में बुनियादी ढांचे के लिए ₹53,686 करोड़ आवंटित थे, जिसे संशोधित अनुमान में घटाकर ₹38,288 करोड़ कर दिया गया।
केंद्र से मिली धनराशि में कमी
जुड़ी वित्तीय असमानताओं पर भी जूली ने सवाल उठाए:
- ब्याजमुक्त लोन: ₹15,000 करोड़ के बजाय ₹9,500 करोड़ (37% की कमी)
- केंद्रीय कर में ₹2,000 करोड़ की कमी
- 16वें वित्त आयोग में राजस्थान का हिस्सा घटकर 5.93% हुआ, जिससे सालाना ₹1,700 करोड़ का नुकसान
सामाजिक और महिला कल्याण पर सवाल
जूली ने महिला और युवा विरोधी चेहरा उजागर करते हुए कहा कि शिक्षक भर्ती में 50% महिला आरक्षण का वादा केवल 30% पर पूरा हुआ। उड़ान योजना जैसी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं को बंद किया गया और रोजगार सृजन पर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में भी कटौती की गई है।
गौ माता और कानून व्यवस्था
सदन में उन्होंने गौ माता की हत्या की बढ़ती घटनाओं पर सरकार की निष्क्रियता को भी उजागर किया। जूली ने जयपुर में एक मामले का जिक्र किया, जिसमें बीजेपी कार्यकर्ता द्वारा गाय का सिर काटकर टांग दिया गया, लेकिन विधायक के हस्तक्षेप से आरोपी को छोड़ा गया। उन्होंने कहा कि गौ माता केवल वोट बैंक के लिए उपयोग की जा रही है और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
जमीन और सामाजिक न्याय पर चिंता
जूली ने गौशाला की 1,100 बीघा जमीन भू-माफिया द्वारा हड़पने का मामला उठाया। साथ ही दलित और वाल्मीकि समाज के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया और मांग की कि भर्ती में उनके लिए विशेष प्रावधान किए जाएं।
समाधान की मांग
जूली ने सदन से प्रस्ताव रखा कि 16वें वित्त आयोग के अन्याय के खिलाफ एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जाए, ताकि राजस्थान के गरीब, किसान और युवाओं के हक का पैसा वापस लौट सके।
साथ ही जूली ने बजट को ‘कर्ज, कटौती और केंद्र के सामने सरेंडर का दस्तावेज’ बताया और भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि विकास के बजाय केवल राजनीतिक लाभ के लिए फैसले किए जा रहे हैं।

