NEET-UG 2026 पेपर लीक:CBI की चार्जशीट में NTA के तीन एक्सपर्ट्स पर आरोप,13 आरोपी नामजद

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नई दिल्ली, 7 अगस्त: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ा दावा किया है। एजेंसी ने 94 पन्नों की चार्जशीट में आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के तीन विषय विशेषज्ञों ने परीक्षा से कई महीने पहले ही प्रश्नपत्र तैयार करने के दौरान सवाल याद कर उन्हें लीक किया। इस मामले में कुल 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, जिनमें तीन NTA विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

चार्जशीट के मुताबिक, विशेषज्ञ NTA कार्यालय से होटल लौटने के बाद याद किए गए सवाल पर्चियों पर लिखते थे। संबंधित अध्यायों को NCERT की किताबों में चिन्हित किया जाता था और बाद में प्रश्न वॉट्सऐप, टेलीग्राम, PDF तथा अन्य डिजिटल माध्यमों से आगे भेजे जाते थे। कुछ मामलों में छात्रों को लीक प्रश्न हाथ से लिखवाकर तैयारी भी कराई गई।

CBI का दावा है कि यह किसी एक व्यक्ति की कार्रवाई नहीं, बल्कि NTA के विशेषज्ञों, निजी कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और कुछ छात्रों की कथित मिलीभगत से संचालित एक संगठित नेटवर्क था। एजेंसी के अनुसार, परीक्षा से कई महीने पहले ही इस नेटवर्क के बीच संपर्क, बैठकें और कथित आर्थिक लेन-देन शुरू हो गया था।

जांच एजेंसी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, चैट रिकॉर्ड, दस्तावेजों, गवाहों के बयान और फोरेंसिक जांच से कथित नेटवर्क के सबूत मिले हैं। चार्जशीट में कुछ कोचिंग संस्थानों के संचालकों और चिकित्सकों को भी साजिश का हिस्सा बताया गया है। CBI के अनुसार, इस नेटवर्क का उद्देश्य कथित तौर पर आर्थिक लाभ कमाना और कुछ कोचिंग संस्थानों के परिणाम बेहतर दिखाना था।

एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। CBI के मुताबिक, BNS की धारा 316(5) के तहत दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धारा 11 के तहत दोषी पाए जाने पर 7 से 10 वर्ष तक की कैद और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

CBI ने बताया कि आरोपियों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज किया गया है। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई के बाद होगा।