नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सोमवार को राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विपक्ष ने जोरदार ढंग से उठाया। विपक्षी दलों ने गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान देने की मांग की, जबकि समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चर्चा कराने की मांग दोहराई।
लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में विपक्षी नेताओं ने दोनों मुद्दों को उठाया। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि पार्टी ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन के मुद्दे पर चर्चा और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज एवं पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्री के बयान की मांग की है। पार्टी सांसद राजीव राय ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार इन मुद्दों को उठा रहा है, लेकिन सरकार चर्चा से बच रही है।
उधर, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से संसद में आकर इन दोनों मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग और राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों पर सरकार जवाब देने से बच रही है।
इधर, लोकसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर नारेबाजी की, जिसके चलते सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
हंगामे के बीच लोकसभा ने बिना चर्चा के सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया, जिसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की जाएगी। वहीं, राज्यसभा ने एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भुगतान में होने वाली देरी की समस्या का समाधान करना है।
संसद के मौजूदा मानसून सत्र में अब तक चार विधेयक पारित हो चुके हैं, जबकि जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन), आयकर (संशोधन), विदेशी अंशदान (एफसीआरए) संशोधन और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान जैसे विधेयकों पर अभी चर्चा और मंजूरी बाकी है।

