केरल विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पलक्कड़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों गठबंधन दशकों से सत्ता बदल-बदल कर राज्य को “लूटते” रहे हैं और वोट बैंक की राजनीति करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एलडीएफ और यूडीएफ के बीच एक तरह की समझ रही है, जिसमें एक दल सरकार में रहकर फायदा उठाता है और फिर दूसरा सत्ता में आकर वही करता है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों दल भाजपा से डरते हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि भाजपा के सत्ता में आने पर कथित घोटालों की जांच होगी।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनने पर राज्य में कथित घोटालों की जांच की जाएगी और लोगों को न्याय मिलेगा। साथ ही उन्होंने केरल में बढ़ते कर्ज और विकास की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने केरल को पहले की तुलना में अधिक बजट दिया है और भाजपा राज्य में विकास के नए अवसर लाना चाहती है।
पश्चिम एशिया में जारी संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय नागरिकों, खासकर खाड़ी देशों में काम कर रहे केरल के लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कांग्रेस पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप भी लगाया।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि केरल में इस बार बदलाव का माहौल है और भाजपा-एनडीए सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
गौरतलब है कि केरल में सभी 140 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। राज्य में पारंपरिक रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सत्ता का बदलाव होता रहा है, हालांकि 2021 में पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटा था।

