नई दिल्ली — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किए। यह सम्मान देशभर के बच्चों को वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि इन बच्चों ने न केवल अपने परिवार और समाज, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये पुरस्कार देश के अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 320 वर्ष पहले सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार पुत्रों ने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने विशेष रूप से छोटे साहिबजादों की वीरता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका साहस भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सम्मानित है। राष्ट्रपति ने उन बाल वीरों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जिन्होंने सत्य और न्याय के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की महानता तब सुनिश्चित होती है, जब उसके बच्चे देशभक्ति और उच्च आदर्शों से प्रेरित हों। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आज सम्मानित बच्चे वीरता, कला-संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार, विज्ञान एवं तकनीक, सामाजिक सेवा और खेल जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्रज्ञनिका का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों के कारण ही भारत आज विश्व पटल पर शतरंज की महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने अजय राज और मोहम्मद सिदान पी. की बहादुरी की सराहना की, जिन्होंने अपनी सूझबूझ से दूसरों की जान बचाई।
राष्ट्रपति ने नौ वर्षीय व्योमा प्रिया और ग्यारह वर्षीय कमलेश कुमार को भी याद किया, जिन्होंने दूसरों की जान बचाते हुए अपने प्राण गंवा दिए। उन्होंने बताया कि दस वर्षीय श्रवण सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध जैसे हालात में सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों तक नियमित रूप से पानी, दूध और लस्सी पहुँचाई। वहीं, दिव्यांग खिलाड़ी शिवानी होसुरु उप्पारा ने आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल जगत में असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कीं। क्रिकेट के क्षेत्र में वैभव सूर्यवंशी ने भी कई रिकॉर्ड बनाकर अपनी पहचान बनाई है।
समारोह के अंत में राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे साहसी और प्रतिभाशाली बच्चे भविष्य में भी देश के लिए प्रेरणास्पद कार्य करते रहेंगे और भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करेंगे।

