गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन,लोकतंत्र और समावेशी विकास पर ज़ोर

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नई दिल्ली:भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में संविधान के मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और समावेशी विकास को देश की ताक़त बताया। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ संविधान दुनिया के सबसे बड़े गणराज्य की आधारशिला है और इसमें निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श हमारे गणतंत्र को दिशा देते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश ने उपनिवेशवादी व्यवस्था से मुक्त होकर लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने वाले प्रयासों की सराहना की।

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और नेताजी को श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्र-प्रेम का स्वर बताया। साथ ही उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका नारा ‘जय हिंद’ आज भी राष्ट्रीय गौरव का उद्घोष है।

महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भूमिका

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर ज़ोर देते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण से देश के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं के नेतृत्व में विकास के लिए अहम क़दम बताया।

युवाओं को देश की विकास यात्रा का ध्वजवाहक बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्टार्टअप, खेल, विज्ञान और उद्यमिता में युवा भारत की नई पहचान गढ़ रहे हैं और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका होगी।

किसान, गरीब और वंचित वर्गों पर फोकस

राष्ट्रपति ने किसानों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि कृषि आत्मनिर्भरता और निर्यात में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने जनजातीय समुदायों, गरीबों और वंचित वर्गों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि इनसे समावेशी विकास को बढ़ावा मिला है।

तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और सुधारों का उल्लेख

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जीएसटी, श्रम सुधारों और बुनियादी ढांचे में निवेश को आर्थिक मजबूती के अहम स्तंभ बताया।

सुरक्षा, पर्यावरण और विश्व-शांति का संदेश

राष्ट्रपति ने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए आतंकवाद के खिलाफ हालिया कार्रवाइयों का ज़िक्र किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और ‘LiFE’ यानी पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को भारत की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बताया और विश्व-शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ देश के गणतंत्र को और सशक्त बनाने का आह्वान किया और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं।