प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आठ दिवसीय विदेश यात्रा की शुरुआत करते हुए बुधवार को अफ्रीकी देश घाना पहुंचे। राजधानी अक्रा के एयरपोर्ट पर घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मोदी को 21 तोपों की सलामी दी गई और गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।
इसके बाद पीएम मोदी होटल पहुंचे, जहां भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। खास बात यह रही कि भारतीय वेशभूषा में स्कूली बच्चों ने उन्हें संस्कृत श्लोक सुनाए।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति महामा के बीच जुबली हाउस में द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, कृषि, डिजिटल तकनीक और वैक्सीन हब डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
बैठक में भारत के UPI और डिजिटल भुगतान प्रणाली को घाना में लागू करने पर भी चर्चा हुई, जिससे दोनों देशों के बीच डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिल सकेगा।
30 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का घाना दौरा
प्रधानमंत्री मोदी 2 जुलाई से 5 देशों की यात्रा पर हैं, जिसमें घाना के बाद वे त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राज़ील और नामीबिया जाएंगे। यह पिछले तीन दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली घाना यात्रा है। इससे पहले 1957 में पंडित नेहरू और 1995 में पीवी नरसिम्हा राव घाना का दौरा कर चुके हैं।
ब्राज़ील में मोदी BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जबकि त्रिनिदाद और नामीबिया में यह उनका पहला आधिकारिक दौरा होगा।
भारत-घाना संबंधों में ऐतिहासिक गहराई
भारत और घाना लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के समर्थक रहे हैं। दोनों देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के सदस्य हैं और संयुक्त राष्ट्र में भी मिलकर काम करते हैं। घाना ने भारत की UNSC में स्थायी सदस्यता के दावे का भी समर्थन किया है।
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने घाना को 6 लाख वैक्सीन डोज और चिकित्सा सहायता प्रदान की थी।
गांधी के विचारों से प्रभावित थे घाना के स्वतंत्रता सेनानी
घाना के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता क्वामे एन्क्रूमा गांधीजी से गहरे प्रभावित थे। अमेरिका में पढ़ाई के दौरान उन्होंने गांधी के सिद्धांतों को अपनाया और ‘पॉजिटिव एक्शन’ जैसे आंदोलनों से ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसात्मक संघर्ष शुरू किया।
उनके नेतृत्व में घाना ने 1957 में ब्रिटेन से आजादी हासिल की और यह उपनिवेशवाद से स्वतंत्र होने वाला अफ्रीका का पहला देश बना। घाना की आजादी से प्रेरणा लेकर अन्य अफ्रीकी देशों में भी स्वतंत्रता आंदोलनों ने रफ्तार पकड़ी।

