नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ‘कर्तव्य भवन – 03’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भवन केवल एक सरकारी दफ्तर नहीं बल्कि देश की नीतियों को आकार देने वाली जगह बनेगा, जो आने वाले दशकों में भारत के विकास की दिशा तय करेगा।
प्रधानमंत्री ने इसे ‘कर्तव्य भवन’ नाम देने के पीछे की सोच भी साझा की और कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘कर्तव्य’ केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण है, जो व्यक्ति से आगे जाकर समष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, “कर्तव्य एक भवन का नाम नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों को साकार करने की पवित्र भूमि है।”
पुराने भवनों की स्थिति पर निशाना
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि आज़ादी के बाद से देश की कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों ने ब्रिटिश काल में बने जर्जर भवनों से काम किया। उन्होंने बताया कि अभी भी दिल्ली में लगभग 50 स्थानों पर बिखरे मंत्रालय किराए के भवनों में काम कर रहे हैं, जिससे हर साल करीब ₹1,500 करोड़ रुपये किराए पर खर्च होते हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों की आवाजाही और ट्रैफिक में समय की बर्बादी से प्रशासनिक क्षमता पर असर पड़ता है।
आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल इमारत
उन्होंने बताया कि कर्तव्य भवन 21वीं सदी के अनुरूप तकनीक, सुरक्षा और सुविधा से युक्त है। इसमें आधुनिक वर्कस्पेस, ई-ऑफिस प्रणाली, डिजिटल अप्रूवल, और ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। यह भवन GRIHA-4 रेटिंग हासिल करने की ओर अग्रसर है और इसमें सौर ऊर्जा, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, और ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं हैं।
पुराने मंत्रालयों की जगह नया केंद्रीय सचिवालय
कर्तव्य भवन – 03 साझा केंद्रीय सचिवालय परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को एक जगह लाना है। यहां गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, डीओपीटी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय होंगे। यह आधुनिक इमारत लगभग 1.5 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली है और सात मंज़िलें (भूतल सहित) और दो बेसमेंट शामिल हैं।
प्रशासनिक सुधारों पर ज़ोर
मोदी ने बीते 11 वर्षों को “सुशासन का दशक” बताया और कहा कि भारत ने जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी जैसे उपायों से योजनाओं में पारदर्शिता लाई है। उन्होंने बताया कि 10 करोड़ फर्जी लाभार्थियों को हटाकर सरकार ने ₹4.3 लाख करोड़ की बचत की है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में 1,500 से अधिक पुराने कानून रद्द किए गए और 40,000 से अधिक अनुपालन आवश्यकताएं समाप्त की गई हैं।
“कर्तव्य से ही अधिकार सुरक्षित होते हैं”
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए कहा कि कर्तव्यों की पूर्ति से ही अधिकारों की नींव मज़बूत होती है। उन्होंने अफसरों से आह्वान किया कि वे हर फाइल को केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की उम्मीद समझें। उन्होंने कहा, “यदि एक फाइल जो एक लाख लोगों से जुड़ी हो, एक दिन देर हो जाती है, तो एक लाख मानवीय दिनों की हानि होती है।”
‘विकास और विरासत’ साथ-साथ
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब ‘विकास और विरासत’ दोनों को साथ लेकर चल रहा है। उन्होंने घोषणा की कि ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को संग्रहालय में बदला जाएगा, जिसका नाम होगा “युगे युगेन भारत संग्राहलय”, जहां देशवासी भारत की सभ्यतागत यात्रा को करीब से देख सकेंगे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री ने अंत में देशवासियों को कर्तव्य भवन के उद्घाटन की बधाई दी और कहा कि यह भवन केवल कर्मचारियों का दफ्तर नहीं बल्कि भारत के सपनों और संकल्पों की ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे इसे देश सेवा का नया अध्याय बनाने में योगदान दें।

