प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम के दौरान समुद्री और अन्य विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनकी कुल लागत ₹34,200 करोड़ से अधिक है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत समुद्र को अवसरों का बड़ा जरिया मानता है और “चिप्स हों या शिप्स, हमें भारत में ही बनाने होंगे।” उन्होंने जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत ही 140 करोड़ भारतीयों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।
मोदी ने ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि बड़े जहाजों को अब इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया गया है। इससे शिपबिल्डिंग कंपनियों को आसान फाइनेंसिंग और कम ब्याज दरों का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत को फिर से समुद्री ताकत बनाने के लिए तीन नई योजनाओं पर ₹70,000 करोड़ से अधिक निवेश होगा।
पीएम ने बताया कि आज देश के सभी बड़े बंदरगाहों पर ‘वन नेशन, वन डॉक्यूमेंट’ और ‘वन नेशन, वन पोर्ट’ की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य है कि 2047 तक वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी हिस्सेदारी को तीन गुना करना।
उन्होंने अपील की कि हर भारतीय “स्वदेशी उत्पाद खरीदें और गर्व से कहें- यह स्वदेशी है।”
कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे।

