राहुल गांधी का हल्द्वानी ‘शुद्धीकरण’ विवाद पर हमला,बोले- खड़गे के अपमान पर FIR दर्ज हो

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद मंच के कथित ‘शुद्धीकरण’ को लेकर बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा है। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने प्रोजेक्टर के जरिए मल्लिकार्जुन खड़गे का भाषण भी दिखाया और आरोप लगाया कि दलितों के साथ भेदभाव और अपमान की घटनाएं आज भी देश के कई हिस्सों में होती हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में दलित बच्चों से सफाई कराने, सार्वजनिक कुओं से पानी लेने से रोकने और शादी में दलित दूल्हों को घोड़ी पर बैठने से रोकने जैसी घटनाएं सामाजिक भेदभाव की हकीकत को दिखाती हैं।

‘शुद्धीकरण छुआछूत का दूसरा नाम’

राहुल गांधी ने कहा कि खड़गे के 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने के दो दिन बाद वहां हवन कर मंच का ‘शुद्धीकरण’ किया गया। कांग्रेस ने इस घटना को दलितों के अपमान और छुआछूत से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ऐसी घटनाएं संविधान में दिए समानता के अधिकार के खिलाफ हैं। पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इसे जातिवाद और छुआछूत का रूप बताते हुए SC/ST एक्ट के तहत FIR की मांग की।

बीजेपी ने कहा- ‘जाति का कोई एंगल नहीं’

बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सामने आए वीडियो में घटना का कोई जातिगत एंगल दिखाई नहीं देता। उन्होंने कांग्रेस पर हिंदू समाज को बांटने के लिए बार-बार जाति से जुड़े मुद्दे उठाने का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और उत्तराखंड के मंत्री खजान दास ने भी कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए। वहीं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि इस घटना का बीजेपी, आरएसएस या NDA से कोई संबंध नहीं है और समाज में ऐसी सोच रखने वाले लोगों की निंदा की जानी चाहिए।

आयोजक ने दी अलग वजह

रामलीला मैदान में हुए कार्यक्रम के आयोजक गिरिश चंद्र पांडे ने शुद्धीकरण को जातिगत भेदभाव से जोड़ने से इनकार किया। उनका कहना है कि मंच पर गंदगी और कचरा था, जिसे साफ करने के बाद जगह की पवित्रता बहाल करने के लिए यज्ञ किया गया था। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश बताया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में आरोप लगाया कि हल्द्वानी में उनके भाषण के बाद मंच का ‘शुद्धीकरण’ किया गया। खड़गे ने इसे लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों से जोड़ते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।