जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई है। आखिरी दिन प्रदेश के कई शहरों में भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक किए। इसके साथ ही कई जगहों पर टिकट वितरण को लेकर असमंजस, विरोध और बगावत की तस्वीर भी सामने आई।
जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, भरतपुर, बीकानेर और सीकर समेत कई नगर निकायों में प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद अब चुनावी मुकाबला स्पष्ट होने लगा है। हालांकि कुछ वार्डों में दोनों प्रमुख दलों ने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं।
जयपुर में टिकट को लेकर असमंजस
जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 76 में भाजपा के टिकट को लेकर आखिरी समय तक स्थिति साफ नहीं रही। पार्टी ने पहले पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट को प्रत्याशी बनाए जाने की बात सामने आई थी, जबकि मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ की ओर से कुलदीप मिश्रा को अधिकृत सिंबल दिए जाने की बात सामने आई।
सिंबल मिलने के बाद कुलदीप मिश्रा ने वार्ड से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया। विधायक सराफ के मुताबिक, पहले कुलदीप मिश्रा का नाम तय था और प्रत्याशी बदले जाने से पहले ही उन्हें सिंबल दिया जा चुका था।
जयपुर में निवर्तमान मेयर कुसुम यादव का टिकट भी कट गया। पार्टी ने पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को वार्ड 112 से मैदान में उतारा है। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मीडिया ओएसडी की पत्नी प्रतिभा शर्मा को वार्ड 87 से भाजपा प्रत्याशी बनाया गया है।
जोधपुर में टिकट के बाद विरोध
जोधपुर नगर निगम के चुनाव में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्टी के भीतर विरोध के स्वर भी सामने आए हैं। भाजपा ने नामांकन की समय सीमा खत्म होने से करीब एक घंटे पहले अपनी सूची जारी की, जबकि कांग्रेस ने पहले प्रत्याशियों के सिंबल जमा कराए और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सूची सार्वजनिक की।
कांग्रेस की प्रदेश महासचिव डॉ. अनिता परिहार ने टिकट वितरण से नाराज होकर आरएलपी के टिकट पर वार्ड 99 से नामांकन दाखिल किया।
इससे एक दिन पहले उन्होंने वीडियो जारी कर पूर्व मेयर कुंती देवड़ा और उनके चचेरे भाई मयंक देवड़ा को टिकट दिए जाने का विरोध किया था।
जोधपुर में वार्ड 78 से कांग्रेस प्रत्याशी पूनम कंवर घूंघट में नामांकन दाखिल करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि घूंघट रखने या न रखने से काम करने की क्षमता पर फर्क नहीं पड़ता और वह पहले सरपंच के तौर पर काम कर चुकी हैं।
नामांकन के अंतिम दिन जोधपुर में 698 उम्मीदवारों ने पर्चे दाखिल किए। अब तक कुल 725 उम्मीदवार नामांकन कर चुके हैं।
उदयपुर में बड़े चेहरों पर दांव
उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी सामने आ चुके हैं। भाजपा ने वरिष्ठ नेता प्रमोद सामर, पारस सिंघवी, दिनेश भट्ट और अतुल चंडालिया जैसे चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है।
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के दामादों के भाइयों को भी भाजपा ने टिकट दिया है। वार्ड 5 से आकाश वागरेचा और वार्ड 78 से अतुल चंडालिया को प्रत्याशी बनाया गया है।
इसके अलावा पूर्व देहात जिलाध्यक्ष तख्तसिंह शक्तावत के बेटे जितेंद्र सिंह शक्तावत और पूर्व शहर जिलाध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली के भतीजे जतिन श्रीमाली को भी टिकट मिला है। भाजपा ने कांग्रेस से भाजपा में आए लोकेश गौड़ की पत्नी अमिता गौड़ को भी उम्मीदवार बनाया है।
बीकानेर में पूर्व यूआईटी चेयरमैन का टिकट कटा
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए भाजपा ने अपनी सूची जारी की है। वार्ड 75 से पूर्व यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका का नाम टिकट के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था और उन्होंने नामांकन भी दाखिल किया था। लेकिन पार्टी की आधिकारिक सूची में उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उनकी जगह विशाल गोलच्छा को प्रत्याशी बनाया गया है।
भरतपुर में कांग्रेस ने सात वार्ड छोड़े
भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस ने 58 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं, जबकि सात वार्डों—10, 14, 17, 34, 38, 50 और 65—को पार्टी ने खाली छोड़ा है।
वार्ड 3 से कांग्रेस ने NSUI के जिला अध्यक्ष हरजीत सांखला को टिकट दिया है। वे पहले कांग्रेस सांसद संजना जाटव के विरोध को लेकर चर्चा में रहे थे।
वार्ड 24 में टिकट को लेकर कांग्रेस के दो दावेदारों के बीच मुकाबला था, लेकिन पार्टी ने रेनू गोरावर को उम्मीदवार बनाया। टिकट नहीं मिलने वाले दावेदार दाऊदयाल शर्मा ने नामांकन दाखिल नहीं किया।
भरतपुर के वार्ड 25 और 26 में भी पार्टी के टिकट वितरण को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा रही। वहीं वार्ड 19 में मनोज सिंह को भाजपा और कांग्रेस दोनों की ओर से टिकट दिए जाने की बात सामने आई, हालांकि उन्होंने भाजपा से चुनाव लड़ने की बात कही है।
सीकर में सभी 65 वार्डों में मुकाबला
सीकर नगर परिषद के सभी 65 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। भाजपा ने वार्ड 11 से रतनलाल जलधारी के पोते यश जलधारी को टिकट दिया है।
कांग्रेस ने वार्ड 15 से खतीजा बानो और वार्ड 16 से उनके पति जीवण खां को मैदान में उतारा है। वार्ड 34 से अशोक चौधरी और वार्ड 40 से उनकी बहू किरण को टिकट दिया गया है।
झुंझुनूं और बांसवाड़ा में भी तस्वीर अलग
झुंझुनूं नगर परिषद में भाजपा ने 19 वार्डों में प्रत्याशी नहीं उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने नौ वार्डों में उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। बांसवाड़ा नगर परिषद में भारत आदिवासी पार्टी ने 60 में से 20 वार्डों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं।
नामांकन के दौरान विवाद और विरोध
नामांकन के आखिरी दिन प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से प्रत्याशियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की घटनाएं भी सामने आईं। सीकर में नामांकन के दौरान हुई मारपीट में कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई, जबकि भरतपुर में एक महिला प्रत्याशी की पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक हुई।
कई जगहों पर टिकट की घोषणा में देरी के कारण प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति रही। कुछ उम्मीदवार समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर सके।
अब बागियों और निर्दलीयों पर नजर
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब राजनीतिक दलों के सामने अगली चुनौती टिकट से वंचित दावेदारों को साधने की है। कई वार्डों में बागी और निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले वाली सीटों पर अब उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय मुद्दे और पार्टी से नाराजगी अहम भूमिका निभा सकती है।
नामांकन वापसी के बाद ही यह तस्वीर पूरी तरह साफ होगी कि राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में कितने वार्डों में सीधा मुकाबला होगा और कितनी सीटों पर बागी या निर्दलीय उम्मीदवार मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनाएंगे।

