बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में छठे विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। बिश्केक एरीना में आयोजित समारोह के दौरान उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे भारतीय दल का अभिवादन किया।
भारतीय दल में कुल 87 सदस्य शामिल हैं, जिनमें 73 खिलाड़ी, 10 सांस्कृतिक प्रतिनिधि और वैज्ञानिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले चार प्रतिभागी हैं। राष्ट्रीय ध्वज के साथ भारतीय दल जब उद्घाटन समारोह में मार्च करता हुआ गुजरा, तो प्रधानमंत्री मोदी ने हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया।
छठे विश्व घुमंतू खेलों का आयोजन 31 अगस्त से 6 सितंबर तक किर्गिस्तान में हो रहा है। इन खेलों में दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ी और प्रतिभागी पारंपरिक खेलों, संस्कृति और घुमंतू सभ्यताओं की विरासत को प्रदर्शित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सद्यर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक पहुंचे हैं। अपनी यात्रा के दौरान वह शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के 26वें शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे।
43 खेलों में मुकाबले
2026 के विश्व घुमंतू खेलों में कुल 43 खेल विधाओं को शामिल किया गया है। इनमें पारंपरिक कुश्ती के अलग-अलग रूपों के अलावा घुड़सवारी, रणनीतिक बोर्ड गेम और पारंपरिक टीम खेल भी शामिल हैं।
प्रतियोगिता में गोरेश, कुराश और मंगोल बोख जैसी पारंपरिक कुश्ती शामिल हैं। इसके अलावा कोक बोुरू, केकपार, तोगुज करगूल, मंगला, ओवेयर, चुको, ओर्दो, रस्साकशी और स्ट्रॉन्गमैन जैसी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं।
कुराश उज्बेकिस्तान की पारंपरिक खड़े होकर की जाने वाली कुश्ती है, जिसमें प्रतिद्वंद्वी को पीठ के बल गिराना लक्ष्य होता है। वहीं मंगोल बोख मंगोलिया की पारंपरिक कुश्ती है, जिसमें खिलाड़ी को अपने प्रतिद्वंद्वी के पैरों या हाथों के अलावा शरीर के किसी हिस्से को जमीन पर टिकाने के लिए मजबूर करना होता है।
तोगुज करगूल मध्य एशिया का पारंपरिक बोर्ड गेम है, जो मैनकाला खेलों के परिवार से जुड़ा है। इसमें खिलाड़ियों को रणनीति और गणना के ज़रिए अपने प्रतिद्वंद्वी से अधिक गोटियां हासिल करनी होती हैं। मंगला भी रणनीति पर आधारित पारंपरिक तुर्की बोर्ड गेम है, जबकि ओवेयर अफ्रीकी मूल का पारंपरिक बोर्ड गेम है।
चुको में भेड़ की साफ की गई टखने की हड्डियों का इस्तेमाल किया जाता है। खिलाड़ी एक भारी हड्डी की मदद से दूसरी गोटियों को निर्धारित घेरे से बाहर निकालने की कोशिश करते हैं। वहीं ओर्दो में खिलाड़ी एक बड़े घेरे के भीतर रखी हड्डियों को निशाना बनाते हैं और इसे सैन्य रणनीति और टीमवर्क से जोड़कर खेला जाता है।
घुमंतू सभ्यताओं की विरासत का मंच
विश्व घुमंतू खेलों की शुरुआत 2014 में किर्गिस्तान से हुई थी। इन खेलों की अवधारणा 2012 में तुर्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में हुए बिश्केक घोषणापत्र के बाद सामने आई थी। इसके बाद 2016 और 2018 में भी इनका आयोजन किर्गिस्तान में हुआ। 2022 में तुर्की के इज़निक और 2024 में कज़ाख़स्तान के अस्ताना में विश्व घुमंतू खेल आयोजित किए गए।
2026 के खेलों के प्रमुख आयोजन किर्गिस्तान के चोलपोन-अता, किर्चिन और इस्सिक-कुल क्षेत्र के अन्य स्थानों पर हो रहे हैं।
उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी भारत और किर्गिस्तान के बीच संबंधों के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति, खेल और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत की भागीदारी को भी रेखांकित करती है।

