राष्ट्रपति का संसद में अभिभाषण:‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के लिए सुधार,समावेशन और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर

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नई दिल्ली —भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका पेश किया। अपने अभिभाषण में उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने तेज़ विकास, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और सरकार का लक्ष्य “सच्चे सामाजिक न्याय” के माध्यम से हर नागरिक को समान अवसर देना है। उन्होंने आवास, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे देश के गरीब और मध्यम वर्ग को सीधा लाभ मिला है।

उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। कृषि उत्पादन, दुग्ध और मत्स्य क्षेत्र, मैन्युफैक्चरिंग, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। राष्ट्रपति ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और पीएलआई योजना के चलते भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर देते हुए राष्ट्रपति ने रेलवे, वंदे भारत ट्रेनों, मेट्रो नेटवर्क, राष्ट्रीय राजमार्गों, इनलैंड वॉटरवेज और हवाई संपर्क के विस्तार को देश की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि स्पेस सेक्टर में भी भारत नए युग में प्रवेश कर चुका है और गगनयान मिशन पर तेज़ी से काम जारी है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने युवाओं और महिलाओं को विकास की धुरी बताते हुए कहा कि महिला नेतृत्व वाला विकास सरकार की प्रमुख सोच है। स्वयं सहायता समूहों, ‘लखपति दीदी’, ड्रोन दीदी और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों से करोड़ों महिलाओं और युवाओं को आर्थिक सशक्तिकरण मिला है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद और माओवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की गई है और प्रभावित जिलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

विदेश नीति पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर “सेतु राष्ट्र” की भूमिका निभा रहा है और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूती से उठा रहा है। यूरोपीय संघ के साथ हालिया मुक्त व्यापार समझौते को उन्होंने युवाओं और उद्योग के लिए नए अवसर पैदा करने वाला कदम बताया।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य किसी एक सरकार का नहीं बल्कि सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में एकजुट होकर देश को आगे बढ़ाएं।राष्ट्रपति ने सत्र के सफल संचालन की शुभकामनाओं के साथ अपना अभिभाषण समाप्त किया।