सचिन पायलट ने उठाए केंद्र की जातिगत जनगणना की मंशा पर सवाल, तुरंत शुरू करने की मांग

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नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मंगलवार को केंद्र सरकार की जातिगत जनगणना की योजना पर सवाल उठाए। जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार की अधिसूचना में 2027 से जातिगत जनगणना शुरू करने की बात कही गई है, जो समझ से परे है। पायलट ने मांग की कि इस जनगणना को तत्काल शुरू किया जाए ताकि समाज के विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

मुख्य बिंदु:

  1. जातिगत जनगणना का उद्देश्य: पायलट ने स्पष्ट किया कि जातिगत जनगणना का उद्देश्य केवल जाति गिनना नहीं है, बल्कि इसके जरिए यह जानना जरूरी है कि लोग किन परिस्थितियों में रह रहे हैं, उनकी शिक्षा, आय, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, और सरकारी योजनाओं का कितना लाभ उन्हें मिल रहा है। पायलट ने सवाल उठाया कि बिना इन आंकड़ों के, सरकार समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए प्रभावी नीतियां कैसे बना सकती है।
  2. समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जरूरी आंकड़े: पायलट ने जोर देकर कहा कि जातिगत जनगणना से सरकार को समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जरूरी आंकड़े मिलेंगे, जिनकी मदद से सही नीतियां बनाई जा सकेंगी। उन्होंने कहा कि जनगणना से न केवल वर्तमान स्थिति का पता चलेगा, बल्कि भविष्य में समाज के विकास के लिए योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
  3. तेलंगाना सरकार का उदाहरण: पायलट ने तेलंगाना सरकार के जातिगत जनगणना को आदर्श बताते हुए कहा कि वहां विशेषज्ञों, एनजीओ और तकनीकी जानकारों को शामिल कर एक व्यापक और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई। पायलट ने कहा कि इस प्रक्रिया से न केवल सटीक आंकड़े मिले, बल्कि भविष्य के योजनाओं और बजट आवंटन के लिए भी स्पष्ट दिशा मिली।
  4. कांग्रेस की स्थिति: पायलट ने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि जातिगत जनगणना से समाज के कमजोर वर्गों को लाभ पहुंचाने का रास्ता खुलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी और केंद्र सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग करेगी, क्योंकि यह मुद्दा सामाजिक न्याय से जुड़ा है, जो पूरे देश, विशेष रूप से राजस्थान में, महत्वपूर्ण है।

जातिगत जनगणना की योजना:

केंद्र सरकार ने सोमवार को जारी अधिसूचना में बताया कि जातिगत जनगणना दो चरणों में होगी:

  • पहला चरण 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा, जिसमें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल होंगे।
  • दूसरा चरण 1 मार्च 2027 से शुरू होगा, और संदर्भ तारीख 1 मार्च 2027 को रात 12 बजे होगी, जबकि बर्फीले क्षेत्रों के लिए यह तारीख 1 अक्टूबर 2026 होगी।

कांग्रेस की मांग:

पायलट ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतनी देरी से जनगणना शुरू करने की मंशा संदिग्ध है। कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी और सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग करेगी। यह मुद्दा राजस्थान और पूरे देश में सामाजिक न्याय से जुड़ा है, जो अब चर्चा का प्रमुख केंद्र बन गया है।

यह मुद्दा न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जातिगत जनगणना से प्राप्त आंकड़े समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने में सहायक हो सकते हैं।