कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए कहा है कि इसके दूरगामी परिणाम किसानों, छोटे व्यापारियों और युवाओं के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील से खासकर कपास और सोयाबीन उत्पादकों के हित प्रभावित हो सकते हैं और छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के भविष्य को जोखिम में डाला गया है।
पायलट ने कहा कि यह केवल एक सामान्य व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि दबाव की स्थिति में हुआ समझौता प्रतीत होता है। उनके मुताबिक, पहले अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले 3 से 5 प्रतिशत टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक किया गया और बाद में उसे 18 प्रतिशत किए जाने को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लगभग 500 अरब डॉलर के व्यापार समझौते में भारत क्या खरीदेगा और किस कीमत पर खरीदेगा, इस पर स्पष्टता नहीं है।
ऊर्जा-सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी देश द्वारा यह तय किया जाना कि भारत तेल कहां से खरीदे, देश की रणनीतिक स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। रूस से तेल खरीद को लेकर सरकार के भीतर स्पष्ट नीति न होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न मंत्रियों के बयानों में भी असमंजस दिखाई देता है।
पायलट ने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार इस मुद्दे को सदन के भीतर और बाहर उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने लोगों से इन मुद्दों पर जागरूक रहने की अपील भी की।

