बाड़मेर, 30 अक्टूबर।
शिव विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में विकास की नई रोशनी फैलाने की दिशा में विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने डीएनपी (डेजर्ट नेशनल पार्क) क्षेत्र के उन गांवों के विद्युतीकरण के लिए अपने विधायक निधि से समस्त खर्च वहन करने की स्वीकृति प्रदान कि है, जो आज़ादी के बाद से अब तक बिजली से वंचित थे। यह निर्णय न केवल इन गांवों के निवासियों के जीवन में नई ऊर्जा भरने वाला है, बल्कि यह ग्रामीण विकास के प्रति विधायक भाटी की दूरदृष्टि और संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।
इस योजना के तहत सिरगुवाला गांव में विद्युतीकरण कार्य, मोकमसिंह की ढाणी बच्चिया में ट्रांसफार्मर की स्थापना, और कुम्पाणियों की ढाणी लांबड़ा में विद्युतीकरण कार्य किया जाएगा। इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह कदम ऐतिहासिक महत्व का है, क्योंकि ये बस्तियाँ आज़ादी के लगभग 78 वर्षों बाद अब पहली बार बिजली की सुविधा से जुड़ेंगी।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल के लिए विधायक भाटी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक अंधेरे में जीवन गुज़ारना उनकी मजबूरी थी — बच्चों की पढ़ाई से लेकर घरेलू कार्यों तक सब कुछ कठिनाइयों के बीच होता था। अब बिजली पहुँचने से न केवल जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि
“डीएनपी क्षेत्र विकास की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां के लोग दशकों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे हैं। मेरा प्रयास है कि इस क्षेत्र का कोई भी गांव अब अधेरे में न रहे। यह सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि विकास की पहली किरण है जो इन बस्तियों के भविष्य को रोशन करेगी।”
भाटी ने यह भी बताया की कमलाणी (बिजाबल) की स्वीकृति भी जल्द ही जारी होगी और आगामी दिनों में वहा भी विद्युतीकरण का कार्य प्रारंभ होगा साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में डीएनपी क्षेत्र के शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से विद्युत सुविधा से जोड़ा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों को शीघ्रता और पारदर्शिता से पूरा किया जाए ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
डीएनपी क्षेत्र, जो कि राजस्थान के सबसे दुर्गम इलाकों में गिना जाता है, में सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वर्षों तक विकास कार्यों की रफ्तार धीमी रही। ऐसे में यह पहल एक मील का पत्थर साबित होगी और ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही अंधकारमय जिंदगी से मुक्ति दिलाएगी।

