कार्यशाला में हुयी परिवार कल्याण कार्यक्रम की राज्यस्तरीय समीक्षा

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जयपुर, 15 अक्टूबर। प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम की प्रगति व उपलब्धियों की समीक्षा हेतु बुधवार को कार्यशाला आयोजित की गयी। राज्यस्तरीय कार्यशाला में परिवार नियोजन हेतु संचालित विभिन्न परिवार कल्याण योजनाओं, कार्यक्रमों एवं उपलब्ध करवायी जा रही विभिन्न गर्भनिरोधक सेवाओं की जिलावार प्रगति पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक दिशा-निदेश दिये गये।

मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. अमित यादव की अध्यक्षता में एनएचएम, डवलपमेंट पार्टनर आईपास एवं विकल्प संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समीक्षा बैठक में उपस्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक उपलब्ध करवायी जा रही विभिन्न परिवार नियोजन साधनों यथा तीन महीने के अंतराल पर अंतरा इंजेक्शन, पीपीआईयूसीडी, छाया व अन्य ओरल पिल्स सहित स्थायी साधन महिला व पुरुष नसबंदी की प्रगति एवं उपलब्धियों की जिलावार समीक्षा की गयी।

डॉ. यादव ने कहा कि नव दम्पत्तियों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित कर उन्हें परिवार नियोजन की नई पहल किट तथा परामर्श सेवाएं उपलब्ध करवायी जाये। परिवार कल्याण कार्यक्रम में कार्यरत स्वास्थ्यकार्मिकों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण यथासमय पूरे किये जायें और आउटरीच कैम्प आयोजित कर परिवार नियोजन की निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार नसबंदी व अन्य सेवाएं सुनिश्चित की जायें। उन्होंने अंतरा इंजेक्शन की पहली डोज के बाद अन्य सतत डोज आवश्यकरूप से लाभार्थी महिला के लगवाने के लिए फोलोअप करने हेतु गंभीरता बरतने के निर्देश दिये।

निदेशक परिवार कल्याण डॉ. मधु रतेश्वर ने बताया कि गर्भधारण अंतराल को रोकने में अंतरा इंजेक्शन महिलाओं में लोकप्रिय साधन है और इस वर्ष नये 1 लाख, 8 हजार 724 लाभार्थियों ने उपयोग किया है। उन्होंने बताया 1 लाख, 39 हजार 825 महिलाओं ने प्रसव पश्चात् आईयूसीडी का एवं 3 लाख, 17 हजार 91 ने आईयूसीडी का लाभ लिया है। उन्होंने बताया कि उपस्वास्थ्य केन्द्रों तक अंतरा, छाया, आईयूसीडी इत्यादि गर्भनिरोधक साधनों की सेवाएं निशुल्क उपलब्ध करवायी जा रही हैं।

डॉ रतेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जिले में अधिकतम आयुष्मान केंद्र तक सुरक्षित गर्भपात सुविधाएँ प्रशिक्षित सेवा प्रदाता के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएँ। इसके लिये निरंतर चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग एवं आइपास डेवलपमेंट फाउंडेशन संस्थान के सहयोग से प्रतिवर्ष करीब 250 चिकित्सको गर्भपात सेवाएं देने हेतु प्रशिक्षण के माध्यम से प्रमाणित किया जाता है। उन्होंने बताया कि असुरक्षित गर्भपात के कारण करीब 8 प्रतिशत मातृ मृत्यु होती है, इसलिए आधुनिक एवं सुरक्षित तकनीक जैसे MVA एवं गोलियों द्वारा गर्भपात सेवा सुनिश्चित की जा रही, जिससे मातृ मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की जा सके।

कार्यशाला में परिवार कल्याण के परियोजना निदेशक डॉॅ. सुरेन्द्र सिंह शेखावत व वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. जे.पी.बुनकर, सभी जिलों के परिवार कल्याण के डिप्टी सीएमएचओ व जिला आशा समन्वयक, डवलपमेंट पार्टनर संस्थानों के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।
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