राजस्थान की राजधानी जयपुर में सेना के सप्त शक्ति कमान के तहत ‘नेक्स्ट-जेनरेशन कॉम्बैट: शेपिंग टुमारोज़ मिलिट्री टुडे’ विषय पर दो दिवसीय तकनीकी सेमिनार आयोजित किया गया। इस अहम आयोजन में नाटो (NATO) देशों के विशेषज्ञों की भागीदारी ने सेमिनार को वैश्विक दृष्टिकोण और अनुभवों से समृद्ध किया।
सैन्य रणनीति और तकनीक का संगम
सेमिनार का उद्देश्य था—भारत की रक्षा शिक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमताओं को अगले स्तर तक पहुंचाना। आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने बताया कि चर्चा का केंद्रबिंदु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोनॉमस सिस्टम्स और मिलिट्री एकेडमी मॉडल जैसे अत्याधुनिक विषय रहे।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीकी बढ़त से जीते जाएंगे। ऐसे में स्वदेशी तकनीक और रक्षा नवाचार की अहमियत बढ़ गई है।
राजस्थान में डिफेंस कॉरिडोर की संभावनाएं
राजस्थान की रणनीतिक स्थिति पर जोर देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कहा कि राज्य की पाकिस्तान से लगती लंबी सीमा को देखते हुए यहां डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना से सेना को सीधा लाभ मिलेगा।
फिलहाल देश में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में डिफेंस कॉरिडोर बनाए गए हैं, लेकिन सेना ने राजस्थान को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। राज्य सरकार के साथ इस मुद्दे पर वार्ता जारी है, और छह माह के भीतर इससे जुड़ी एक नीति लाने की बात कही गई है।
सीमावर्ती इलाकों में अंडरग्राउंड निर्माण की आवश्यकता
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान मिले नागरिक सहयोग का उल्लेख करते हुए जनरल सिंह ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में अंडरग्राउंड निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में 40 किलोमीटर तक के बॉर्डर क्षेत्र में नए निर्माण कार्यों को भूमिगत किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस प्रस्ताव में सरकार से सब्सिडी देने की मांग भी की गई है, ताकि स्थानीय आबादी इन निर्माणों को अपना सके। उन्होंने इजराइल-ईरान संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि आज सिविलियन भी युद्ध के प्रभाव से अछूते नहीं रहते।
बदलते सुरक्षा परिदृश्य में तैयार रहने की जरूरत
सेमिनार में वक्ताओं ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को जटिल और अस्थिर बताते हुए कहा कि भारत को हर समय युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए। आधुनिक युद्ध तकनीक-आधारित होंगे और ऐसे में सैन्य बलों के पास तकनीकी बढ़त होना अनिवार्य होगा।
इस दो दिवसीय आयोजन में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक, रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ, स्टार्टअप प्रतिनिधि, विदेशी मेहमान और उद्योग जगत से जुड़े 500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन न केवल भारत की सैन्य तैयारियों को दिशा देने वाला रहा, बल्कि तकनीक और रणनीति के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी सिद्ध हुआ।

