राजस्थान के जैसलमेर जिले के बासनपीर गांव में पौराणिक छतरियों के पुनर्निर्माण को लेकर दो पक्षों में विवाद के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बुधवार को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है।
क्यों लगा तनाव?
तालाब किनारे स्थित इन ऐतिहासिक छतरियों के पुनर्निर्माण को लेकर गांव में लंबे समय से मतभेद चला आ रहा था। 10 जुलाई को जब प्रशासन की अनुमति के बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया, तो इसका एक पक्ष ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया।
इस हिंसा में चार लोग घायल हुए, जिनमें एक पुलिस कॉन्स्टेबल भी शामिल है। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। कई वाहनों में तोड़फोड़ हुई और पुलिस ने 15 महिलाओं सहित दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर जेल भेजा।
प्रशासन ने क्यों लागू की धारा 163?
उपखंड अधिकारी सक्षम गोयल ने बताया कि क्षेत्र में शांति भंग की आशंका और संभावित सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने आम जनता से अफवाहों से बचने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।
क्या हैं धारा 163 के तहत प्रतिबंध?
- हथियारों पर रोक: गांव की सीमा में कोई भी व्यक्ति हथियार लेकर नहीं घूम सकेगा। हालांकि, सिख समुदाय को कृपाण रखने की अनुमति दी गई है।
- राजकीय ड्यूटी पर छूट: पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इस आदेश से मुक्त रहेंगे।
- भड़काऊ प्रचार पर रोक: किसी भी तरह के उत्तेजक भाषण, पोस्टर, ऑडियो-वीडियो या नारों पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- भीड़ पर नियंत्रण: पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी रहेगी।
- लाउडस्पीकर का उपयोग: बिना अनुमति ध्वनि यंत्रों के उपयोग की मनाही है।
- धार्मिक अधिकारों का सम्मान: संवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी।
राजनीतिक हलचल और बयानबाजी
घटना के बाद राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी, पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी और शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी घटनास्थल पहुंचे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी भी बुधवार को थईयात फांटे पहुंचे, लेकिन धारा 163 के चलते छतरियों तक नहीं गए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए घटना को “चिंताजनक” बताया और संयम बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 19 जुलाई को कांग्रेस नेता “माहौल बिगाड़ने की नीयत” से गांव आना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “जैसलमेर हमेशा से शांति और सद्भाव का प्रतीक रहा है, ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं बेहद दुखद हैं।”
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और किसी भी शरारती तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है और गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अधिकारी स्थानीय लोगों से संवाद के जरिए तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं।

