बॉलीवुड के महान अभिनेता धर्मेंद्र का सोमवार देर रात निधन हो गया। 89 वर्षीय अभिनेता को सांस लेने में दिक्कत के बाद ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत स्थिर न रहने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि पिछले 72 घंटे उनके लिए बेहद क्रिटिकल थे और बेटियों को विदेश से तुरंत मुंबई बुलाया गया था।
अस्पताल में धर्मेंद्र के बेटे सनी देओल, बॉबी देओल, करण और राजवीर देर रात मौजूद रहे। सनी देओल को अस्पताल के बाहर बेहद भावुक देखा गया, वहीं बॉबी देओल शूटिंग बीच में छोड़कर पिता से मिलने पहुंचे। हेमा मालिनी और कई बॉलीवुड सेलेब्स—शाहरुख खान, आर्यन खान, सलमान खान, गोविंदा और अमीषा पटेल सहित—अस्पताल पहुंचे और धर्मेंद्र की हालत के बारे में जानकारी ली।
स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे धर्मेंद्र
धर्मेंद्र को 31 अक्टूबर को भी सांस की तकलीफ के चलते ICU में भर्ती किया गया था। कुछ घंटे बाद हालत में सुधार के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। इस साल की शुरुआत में उनकी कॉर्निया ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई थी। पिछले वर्षों में वे कई बार पीठ दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और कमजोरी जैसी समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती होते रहे।
जल्द रिलीज होगी धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म
धर्मेंद्र आगामी फिल्म इक्कीस में दिखाई देंगे, जिसमें वे युद्ध नायक अरुण खेत्रपाल के पिता की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में अरुण की भूमिका अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा निभा रहे हैं।
सबसे हैंडसम सितारे के रूप में माने जाते थे धर्मेंद्र
धर्मेंद्र को भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे हैंडसम अभिनेता माना जाता है। देव आनंद ने एक बार कहा था—“हे भगवान, ऐसी शक्ल मेरी क्यों नहीं?” दिलीप कुमार भी उनकी पर्सनैलिटी से प्रभावित थे और 1997 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देते समय भावुक हो उठे थे।
संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक की कहानी
धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को लुधियाना के साहनेवाल में हुआ था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने लंबा संघर्ष किया—फिल्म निर्माताओं के दफ्तरों में पैदल चक्कर लगाना, कभी-कभी खाना न मिलना, और बेंचों पर सोना उनकी शुरुआती जिंदगी का हिस्सा रहा। 1960 में दिल भी तेरा हम भी तेरे से उन्हें पहला मौका मिला, जिसके लिए उन्हें सिर्फ 51 रुपये मिले।
धर्मेंद्र के व्यक्तित्व और रिश्ते
धर्मेंद्र अपनी विनम्रता, ज़मीन से जुड़े स्वभाव और मजबूत मानवीय रिश्तों के लिए भी जाने जाते थे। फिल्मकारों के अनुसार, सफलता के बावजूद उनके अंदर एक ग्रामीण सादगी हमेशा जीवित रही।
धर्मेंद्र के निधन से फिल्म इंडस्ट्री, प्रशंसक और देशव्यापी दर्शक शोक में हैं। भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग का एक अध्याय आज समाप्त हो गया।

