भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 74 वर्षीय धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजे अपने त्यागपत्र में लिखा कि वह स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और डॉक्टरों की सलाह का पालन करने के लिए यह निर्णय ले रहे हैं। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।
धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में लिखा, “मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। मैं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के सहयोग के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। सांसदों से जो स्नेह और विश्वास मिला, वह हमेशा स्मरणीय रहेगा।”
पहले भी आ चुकी हैं तबीयत बिगड़ने की खबरें
पिछले महीने उत्तराखंड के एक कार्यक्रम के बाद धनखड़ को सीने में तेज़ दर्द की शिकायत हुई थी। उन्हें नैनीताल के राजभवन में तत्काल चिकित्सकीय देखरेख में लाया गया। मार्च 2025 में भी उन्हें अचानक सीने में दर्द के चलते दिल्ली के AIIMS में भर्ती कराया गया था।
संवैधानिक प्रक्रिया क्या कहती है?
संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत उपराष्ट्रपति इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप सकते हैं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं। जब तक नए उपराष्ट्रपति की नियुक्ति नहीं हो जाती, राज्यसभा के उपसभापति कार्यवाहक सभापति की भूमिका निभाएंगे। फिलहाल यह जिम्मेदारी हरिवंश नारायण सिंह के पास है।
राजनीति से लेकर न्यायपालिका तक का लंबा सफर
राजस्थान के झुंझुनू जिले के किसान परिवार में जन्मे धनखड़ पेशे से वकील रहे हैं। 1989 में वे झुंझुनू से सांसद चुने गए और वीपी सिंह तथा चंद्रशेखर सरकार में मंत्री भी रहे। जुलाई 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। अगस्त 2022 में उन्होंने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उस चुनाव में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था।
धनखड़ ने अपने इस्तीफे में लिखा, “भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और परिवर्तनकारी युग का साक्षी बनना मेरे लिए गर्व और सौभाग्य की बात रही है।”


