भारत में नए उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर को होगा। 21 अगस्त तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। चुनाव की घोषणा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद हुई है। उन्होंने 21 जुलाई की शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 जुलाई को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था।
धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। वे इस्तीफे से कुछ घंटे पहले तक राज्यसभा की कार्यवाही में मौजूद थे।
कैसे होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव?
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं। कुल 6 चरणों में यह प्रक्रिया पूरी होती है — अधिसूचना जारी होने से लेकर नामांकन, प्रचार, मतदान और मतगणना तक।
मतदान में सांसद मतपत्र पर उम्मीदवारों को प्राथमिकता क्रम में अंकित करते हैं और साधारण बहुमत (50% से अधिक वैध मत) हासिल करने वाला उम्मीदवार विजयी होता है।
NDA को संख्याबल का फायदा
वर्तमान संसद में NDA के पास स्पष्ट बहुमत है। लोकसभा में उसके पास 293 और राज्यसभा में लगभग 130 सांसद हैं। कुल मिलाकर NDA को 423 सांसदों का समर्थन प्राप्त है, जबकि विपक्षी I.N.D.I.A. गठबंधन के पास 313 सांसद हैं।
संभावित उम्मीदवार और रणनीति
धनखड़ के इस्तीफे के बाद भाजपा की ओर से कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर के नाम पर विचार हो रहा है। वहीं, विपक्षी I.N.D.I.A. गठबंधन एक संयुक्त उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष मानता है कि भले ही मुकाबला आसान न हो, फिर भी उन्हें मैदान में उतरना चाहिए। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया के लिए रिटर्निंग ऑफिसर और अन्य व्यवस्थाएं तय करनी शुरू कर दी हैं।
राजनीतिक हलकों में अब इस बात पर निगाहें टिकी हैं कि भाजपा सहयोगियों से सहमति बनाकर अपना प्रत्याशी उतारती है या किसी और को समर्थन देती है।

