नागपुर:-महाराष्ट्र के नागपुर में सोमवार रात औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद के बाद हिंसा भड़क गई। महाल इलाके में दो गुटों के बीच झड़प हुई, जिसमें पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। हिंसा विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा औरंगजेब का पुतला जलाने के बाद शुरू हुई।
हिंसा के दौरान पुलिस पर हमला, 15 हिरासत में
पुलिस के मुताबिक, अफवाह फैली कि प्रदर्शनकारियों ने पुतले के साथ धार्मिक पुस्तक भी जलाई है, जिसके बाद माहौल बिगड़ गया। हिंसा में कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए और दो जेसीबी को आग के हवाले कर दिया गया। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। DCP निकेतन कदम पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया, वहीं कई लोग घायल हुए। पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया है।
मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम की सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। वहीं, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने घटना को ‘सुनियोजित हमला’ करार देते हुए कहा कि औरंगजेब का समर्थन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
VHP-बजरंग दल ने कब्र हटाने की मांग तेज की
इससे पहले, छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) में VHP और बजरंग दल ने औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। VHP नेता गोविंद शेंडे ने इसे ‘गुलामी का प्रतीक’ बताते हुए कहा कि ऐसे क्रूर शासक का निशान क्यों रहना चाहिए।
बजरंग दल नेता बोले- ‘अगर सरकार नहीं हटाएगी, तो हम करेंगे कारसेवा’
बजरंग दल नेता नितिन महाजन ने धमकी दी कि अगर सरकार कब्र नहीं हटाती तो वे ‘कारसेवा’ करेंगे, जैसा अयोध्या में बाबरी मस्जिद के मामले में हुआ था।
पुलिस ने कब्र की सुरक्षा बढ़ाई
तनाव को देखते हुए पुलिस ने औरंगजेब की कब्र की सुरक्षा कड़ी कर दी है। इलाके में बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं और मुख्य द्वार बंद कर दिया गया है।
कांग्रेस का BJP पर पलटवार
महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि BJP समर्थित संगठन राज्य में अशांति फैलाना चाहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि औरंगजेब की कब्र हटाने से आखिर क्या मिलेगा?
1707 में बनी थी औरंगजेब की कब्र
मुगल सम्राट औरंगजेब को उनकी इच्छा के अनुसार 1707 में खुल्दाबाद में उनके आध्यात्मिक गुरु के पास दफनाया गया था। बाद में ब्रिटिश वायसरॉय लॉर्ड कर्जन ने वहां संगमरमर लगवाया था। यह स्थल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां आज भी लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं।

