मणिपुर में CBI की गिरफ्तारी के बाद हिंसा भड़की,कई जिलों में इंटरनेट बंद,कर्फ्यू लागू

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इंफाल:-मणिपुर में मैतेई संगठन ‘अरम्बाई टेंगोल’ के प्रमुख करन सिंह और उनके कुछ सहयोगियों की CBI द्वारा गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजधानी इंफाल में शनिवार देर रात भारी हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों ने कई इलाकों में वाहनों में आग लगा दी, टायर और फर्नीचर जलाए और कुछ लोगों ने आत्मदाह की कोशिश की। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है।

राज्य सरकार ने हालात पर काबू पाने के लिए इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में 7 जून रात 11:45 बजे से पांच दिनों के लिए इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं बंद कर दी हैं। इंफाल ईस्ट और बिष्णुपुर जिलों में रात 10 बजे से कर्फ्यू लागू किया गया है। इंफाल ईस्ट कलेक्टर ने लोगों की आवाजाही और हथियार, लाठी या पत्थर लेकर चलने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं।

प्रदर्शनकारियों की आत्मदाह की कोशिश, वाहनों को किया आग के हवाले
इंफाल के क्वाकेथेल और उरीपोक इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने टायर और पुराने फर्नीचर जलाकर सड़कें जाम कर दीं। खुरई लामलोंग में एक बस को आग लगा दी गई। क्वाकेथेल इलाके में गोलियों की आवाजें भी सुनी गईं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वे किसने चलाईं। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने खुद को आग लगाने की कोशिश की।

राजभवन की सुरक्षा बढ़ाई गई, विधायकों की राज्यपाल से मुलाकात
हिंसा की आशंका को देखते हुए राजभवन और उसके आसपास की सड़कों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। केंद्रीय बलों की अतिरिक्त तैनाती भी की गई है। इसी बीच रविवार को मणिपुर के 25 विधायकों और एक सांसद ने राज्यपाल अजय भल्ला से मुलाकात की।

राजनीतिक अस्थिरता और राष्ट्रपति शासन के बीच नई सरकार की मांग
मणिपुर में 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है। विधानसभा निलंबित है, लेकिन भंग नहीं की गई है। 30 अप्रैल को 21 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राज्य में जल्द से जल्द नई लोकप्रिय सरकार बनाए जाने की मांग की थी। बाद में 28 मई को NDA के 10 विधायकों ने राज्यपाल से मिलकर नई सरकार के गठन पर चर्चा की।

मणिपुर हिंसा की पृष्ठभूमि: 4 बिंदुओं में समझें संकट

  1. सामुदायिक संरचना: मणिपुर की करीब 38 लाख की आबादी में मैतेई, नगा और कुकी समुदाय प्रमुख हैं। मैतेई ज्यादातर हिंदू हैं और इंफाल घाटी में रहते हैं। नगा और कुकी ईसाई धर्म मानते हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में बसे हैं।
  2. विवाद की जड़: मैतेई समुदाय ने अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग की है, जिसे हाई कोर्ट ने स्वीकार कर राज्य सरकार को सिफारिश भेजी थी।
  3. अन्य जनजातियों की आपत्ति: नगा और कुकी समुदायों का कहना है कि इससे उनके अधिकारों और संसाधनों पर असर पड़ेगा, क्योंकि पहले से ही मैतेई को राजनीतिक बढ़त हासिल है।
  4. राजनीतिक समीकरण: मणिपुर विधानसभा की 60 सीटों में से 40 सीटें मैतेई बहुल इलाके से आती हैं। अब तक 12 में से केवल दो मुख्यमंत्री ही जनजातीय समुदाय से रहे हैं।

स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।