लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर मंगलवार को करीब नौ घंटे तक चर्चा हुई, लेकिन विधेयक पारित नहीं हो सका। रात 11 बजे स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी। अब विधेयक पर शेष चर्चा और मतदान बुधवार को होगा। इसके बाद इसे राज्यसभा में भी पेश किया जाएगा।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों पर कड़ी कार्रवाई, तेज जांच और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित संशोधनों में दोषियों के लिए सजा और जुर्माने की राशि बढ़ाने, संगठित अपराधों पर कड़ी कार्रवाई, विशेष जांच दल (एसटीएफ) के गठन तथा फास्ट ट्रैक अदालतों में मामलों की सुनवाई का प्रावधान शामिल है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस हुई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने परीक्षा व्यवस्था, छात्रों के विरोध प्रदर्शन और सरकार की जवाबदेही का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि छात्रों का भरोसा व्यवस्था से उठ रहा है। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर भी टिप्पणी की, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रियंका गांधी के बयान को निराधार और व्यक्तिगत आरोप बताते हुए माफी की मांग की। स्पीकर ओम बिरला ने भी कहा कि सदन में बिना तथ्यों के आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए और चर्चा विधेयक तक सीमित रखी जाए। बाद में प्रियंका गांधी की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।
चर्चा के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष परीक्षा सुधारों का समर्थन करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में लगा है। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने और पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए कानून को और सख्त कर रही है।
वहीं कांग्रेस के गौरव गोगोई, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और डिंपल यादव, एनसीपी (शरद पवार) की सुप्रिया सुले, डीएमके के दयानिधि मारन और कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल समेत विपक्षी सांसदों ने सरकार की परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक मामलों की जांच और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। कुछ विपक्षी दलों ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की भी मांग की।
लोकसभा में चर्चा के दौरान पहले तय छह घंटे की अवधि को सभी दलों की सहमति से बढ़ाकर आठ घंटे किया गया, जिसे बाद में देर रात तक जारी रखा गया। कई सांसदों के वक्तव्य बाकी रहने के कारण विधेयक पर अंतिम फैसला बुधवार को होने की संभावना है।

