ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में दूसरे दिन भी प्रदर्शन,24 घंटे बाद CJP के तीन नेता रिहा

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नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में लगातार दूसरे दिन भी विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। राजधानी में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। प्रदर्शन के दौरान दो दिनों में हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को करीब 24 घंटे बाद रविवार सुबह रिहा कर दिया गया। तीनों को शनिवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद रिहा किया गया। रिहाई की शर्तों में एक साल तक शांति भंग नहीं करने की बात शामिल थी।

रिहाई के बाद CJP नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और प्रदर्शन जारी रखने की बात कही।

‘हमें 100 बार जेल में डाल दो, हम डरेंगे नहीं’

रिहाई के बाद आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि देश में जंग जैसे हालात बना दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा।

अभिजीत दीपके ने भी पुलिस पर हिरासत के दौरान अमानवीय व्यवहार करने और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखने के आरोप लगाए। नागपुर पहुंचने पर उन्होंने कहा कि उन्हें चाहे सौ बार जेल में डाल दिया जाए, वे डरने वाले नहीं हैं।

दीपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है और वे फिर से सड़कों पर उतरेंगे।

ये आरोप दीपके ने खुद लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके हिरासत के दौरान किए गए व्यवहार से जुड़े इन आरोपों पर क्या जवाब दिया, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

दादी के निधन की खबर और फोन करने को लेकर विवाद

दीपके ने दावा किया कि हिरासत में रहने के दौरान उन्हें अपनी दादी सावित्रीबाई शंकरराव दीपके के निधन की खबर मिली। उनकी दादी 85 वर्ष की थीं और महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव में उनका निधन हुआ था।

दीपके के मुताबिक, उन्होंने अपने परिवार और वकील से बात करने के लिए फोन मांगा, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस ने उन्हें तड़के करीब 3:30 बजे अपने माता-पिता को गिरफ्तारी की सूचना देने के लिए क्यों कहा, जबकि परिवार पहले से ही दादी के निधन के कारण दुख में था।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की डीसीपी नेहा यादव ने कहा कि पुलिस को दीपके की दादी के निधन की जानकारी मिलते ही अधिकारियों ने उन्हें इसकी सूचना दी और मानवीय आधार पर हरसंभव सहायता की पेशकश की।

पुलिस के मुताबिक, दीपके से पूछा गया था कि क्या उन्हें अपने माता-पिता से बात करने, फोन कॉल करने या नागपुर जाने के लिए विमान की व्यवस्था में मदद चाहिए। डीसीपी ने दावा किया कि अधिकारियों ने उनसे कई बार पूछा कि क्या वे अपने माता-पिता से बात करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

इस तरह, परिवार से संपर्क करने की अनुमति को लेकर दीपके और पुलिस के बयानों में अंतर सामने आया है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया था प्रदर्शन

CJP ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए थे।

प्रदर्शन से पहले राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग की और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद भी विरोध जारी रहा।

दीपके ने इससे पहले कहा था कि 10 अक्टूबर को ‘तानाशाही के अंत की शुरुआत’ के रूप में याद किया जाएगा। हालांकि, यह उनका राजनीतिक बयान है। फिलहाल CJP ने प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है।