नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। घटना उस समय हुई जब सीजेआई की बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट में मौजूद वकीलों के मुताबिक, जूता बेंच तक नहीं पहुंचा और सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी वकील को तुरंत हिरासत में ले लिया।
बाहर जाते वक्त वकील ने नारा लगाया — “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” घटना के बाद सीजेआई गवई ने शांति बनाए रखते हुए कहा, “इससे परेशान न हों, मुझे इन चीज़ों से फर्क नहीं पड़ता।”
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी वकील का नाम राकेश किशोर है, जिनका सुप्रीम कोर्ट बार में 2011 से पंजीकरण है। माना जा रहा है कि वे सीजेआई की उस टिप्पणी से नाराज थे जिसमें उन्होंने खजुराहो के मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की बहाली की मांग पर कहा था — “जाओ और भगवान से खुद करने को कहो।”
यह टिप्पणी 16 सितंबर को उस वक्त दी गई थी जब सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची खंडित मूर्ति की बहाली की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया था।
बढ़ते विवाद पर सीजेआई ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया है और वे “सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करते हैं।”
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सीजेआई का समर्थन करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया पर अक्सर बातें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जाती हैं।
घटना पर VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “न्यायालय न्याय का मंदिर है। हमें अपनी वाणी में संयम रखना चाहिए — खासकर न्यायालय के अंदर। यह जिम्मेदारी न्यायाधीशों, वकीलों और सभी नागरिकों की है।”

